राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस सोर्स- सोशल मीडिया
भारत में हर साल 1 अक्टूबर को नेशनल वॉलंटरी ब्लड डोनेशन डे मनाया जाता है। इस दिन का मकसद देशभर में स्वैच्छिक और निःशुल्क रक्तदान के महत्व के बारे में आम लोगों को आसान और सीधी भाषा में जागरूक करना है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस नेक काम से जुड़ सकें।इस खास दिन की शुरुआत 1 अक्टूबर 1975 को इंडियन सोसाइटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन एंड इम्यूनोहीमेटोलॉजी (ISBTI) ने की थी। इस संस्था की स्थापना खुद 22 अक्टूबर 1971 को हुई थी, और इसने आगे चलकर रक्तदान को लेकर देश में एक बड़ा सामाजिक बदलाव लाने की नींव रखी।के. स्वरूप कृशन, जो रक्तदान आंदोलन के क्षेत्र में जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता थे, और डॉ. जे.जी. जॉली, जो उस समय पीजीआई के ब्लड बैंक प्रमुख थे, दोनों की अगुवाई में इस मुहिम को आगे बढ़ाया गया, जिसका एकमात्र लक्ष्य था सुरक्षित और स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देना।भारत में स्वैच्छिक रक्तदान की शुरुआत दूसरे विश्व युद्ध के दौरान 1942 में हुई थी, जब मोर्चे पर घायल हुए सैनिकों की जान बचाने के लिए बड़ी मात्रा में रक्त की जरूरत पड़ी। उसी दौर में रक्तदान को एक जरूरी और संगठित प्रक्रिया के तौर पर अपनाया जाने लगा।सामाजिक कार्यकर्ता लीला मूलगांवकर ने 1954 में मुंबई में स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों की शुरुआत की। उनकी इस पहल ने आगे चलकर पूरे देश में संगठित रक्तदान आंदोलन को मजबूती दी और कई राज्यों में इसी तर्ज पर शिविर लगने लगे।इस दिन के पीछे दो बड़े मकसद हैं पहला, लोगों को बिना किसी लालच या पैसे के, पूरी तरह स्वैच्छिक भावना से रक्तदान के लिए प्रेरित करना, और दूसरा, जरूरतमंद मरीजों तक सुरक्षित और भरोसेमंद रक्त आसानी से पहुंचे, यह सुनिश्चित करना।एक समय था जब अस्पतालों में पैसे देकर रक्त खरीदा जाता था, जिससे संक्रमण और असुरक्षित रक्त जैसी समस्याएं भी सामने आती थीं। इस मुहिम ने धीरे-धीरे इस प्रथा को खत्म करते हुए पूरी तरह स्वैच्छिक और सुरक्षित रक्तदान प्रणाली को बढ़ावा दिया, जिसे आज विश्व स्वास्थ्य संगठन भी समर्थन देता है।हर राज्य में कॉलेज, एनजीओ, रेड क्रॉस सोसाइटी और धार्मिक संस्थाओं द्वारा रक्तदान शिविर, जागरूकता कार्यक्रम और प्रचार अभियान आयोजित किए जाते हैं। त्रिपुरा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र जैसे राज्य स्वैच्छिक रक्तदान में देश के अग्रणी राज्यों में गिने जाते हैं।सड़क दुर्घटना, बड़ी सर्जरी, प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं या थैलेसीमिया और कैंसर जैसी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए रक्तदान किसी वरदान से कम नहीं। आपका दिया गया एक-एक यूनिट रक्त किसी अनजान इंसान की जिंदगी बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।