

Congress Strategy In Tribal Areas Madhya Pradesh: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज यानी 1 अक्टूबर को मध्य प्रदेश के बालाघाट आ रहे हैं। अब राहुल गांधी का यह दौरा कई मायनों से अहम है। इसके पीछे न केवल भारतीय जनता पार्टी की सरकार को घेरने की रणनीति बल्कि आदिवासी सीटों पर कांग्रेस का होल्ड बनाने की कूट-रणनीति भी है।
कांग्रेस पूरी तैयारी में है कि कैसे न कैसे सरकार को आदिवासी बच्चों की मौत वाले मामले पर घेरा जाए। साथ ही पार्टी इस मुद्दे को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर लगातार उठाए रखना चाहती है। कांग्रेस का मानना है कि आदिवासी बच्चों की मौत का मामला आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकता है।
दरअसल, बालाघाट जिले के बैहर विधानसभा क्षेत्र के आदिवासी बहुल गांवों में जुलाई 2026 से अब तक 30 से अधिक बच्चों की मौत की खबरें सामने आई हैं। मामले में संक्रामक बीमारियों के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, केंद्र की जांच में कई संभावित चिकित्सकीय कारण सामने आए हैं और अब तक किसी एक बीमारी को सभी मौतों की वजह नहीं माना गया है।
बता दें कि, पिछले कुछ महीनों से कांग्रेस इस मुद्दे के जरिए सरकार को घेरने और सवाल उठाने का काम कर रही है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी प्रभावित क्षेत्र और परिवारों तक पहुंचे हैं। कांग्रेस की ओर से स्वास्थ्य सुविधाओं और बच्चों की मौत के आंकड़ों को लेकर आरोप लगाए गए हैं यानी कांग्रेस की पूरी कोशिश है कि यह मुद्दा जल्द ठंड़ा न हो और इसका राजनीतिक लाभ कांग्रेस को आगामी विधानसभा में मिले।
राहुल गांधी की इस यात्रा का उद्देश्य केवल मृत बच्चों के परिजनों से मुलाकात तक सीमित नहीं है। कांग्रेस इस दौरे के जरिए आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं, पोषण, बीमारी की रोकथाम और दूरदराज के गांवों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच जैसे मुद्दों को उठाना चाहती है। यह मुद्दा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि मध्य प्रदेश की करीब 22 फीसदी आबादी आदिवासी समुदाय से है और विधानसभा की 47 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं।
दरअसल, ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी आदिवासी सीटों पर इसलिए भी ज्यादा फोकस कर रही है क्योंकि 2023 के चुनावी आंकड़ों में कांग्रेस को इन सीटों पर 2018 के चुनाव के मुताबिक कम सीटें हाथ लगी थी। जहां 2018 में कांग्रेस ने 47 एसटी आरक्षित सीटों में से 30 पर जीत दर्ज की थी। तो वंही 2023 में भाजपा ने इन सीटों में 24 पर जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस को 22 सीटें मिली थी और बीएपी ने एक सीट जीती थी। ऐसे में राहुल गांधी का बालाघाट दौरा कांग्रेस के लिए सिर्फ एक घटना पर प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को प्रदेश की राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।