मन्ना डे (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
कोलकाता के एक बंगाली फैमिली में जन्मे मन्ना डे के शुरुआती दिन बेहद अनुशासित माहौल में बीते थे। उनके पिता की गहरी इच्छा थी कि वह आगे चलकर कानून की पढ़ाई करें और एक सफल वकील बनें।कॉलेज के दिनों में वह पढ़ाई के साथ-साथ कुश्ती और बॉक्सिंग जैसे खेलों में भी पूरी दिलचस्पी लिया करते थे। लेकिन उनके अंदर म्यूजिक की एक ऐसी अलख जग चुकी थी जिसे रोकना नामुमकिन था। साल 1942 में आई फिल्म तमन्ना ने उनके लिए प्लेबैक सिंगिंग के रास्ते खोल दिए और उन्होंने सुरैया के साथ पहला गाना रिकॉर्ड किया। इसके बाद राम राज्य फिल्म के लिए उनका गाया गया सोलो गीत काफी फेमस हुआ, जिसे महात्मा गांधी ने भी देखा था।50 से 70 के दशक के बीच उनका म्यूजिक इंडस्ट्री पर पूरा दबदबा बन चुका था। उनके गाए गए 3500 से ज्यादा गाने आज भी संगीत प्रेमियों की प्लेलिस्ट का अहम हिस्सा बने हुए हैं।उनके करियर का सबसे दिलचस्प किस्सा फिल्म पड़ोसन से जुड़ा हुआ है जो आज भी लोगों की जुबान पर रहता है। जब उन्हें एक चतुर नार गाना गाने का ऑफर मिला, तो उन्होंने फौरन इसे करने से मना कर दिया था।मन्ना डे का मानना था कि संगीत कला के साथ किसी भी तरह का मजाक स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। उस गाने के कुछ बोल और मजाकिया अंदाज उन्हें रास नहीं आ रहे थे।