महात्मा गांधी स्वतंत्रता संग्राम फोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन
भारत लौटने के बाद गांधीजी का पहला बड़ा आंदोलन बिहार के चंपारण में शुरू हुआ। यहां अंग्रेज बागान मालिक किसानों को जबरन नील की खेती करने पर मजबूर करते थे। गांधीजी के नेतृत्व में यह अन्याय आखिरकार खत्म हुआ, और यह भारत में उनका पहला सत्याग्रह बना।गुजरात के खेड़ा जिले में फसल बर्बाद होने के बावजूद किसानों पर भारी लगान वसूला जा रहा था। गांधीजी ने किसानों के साथ मिलकर अंग्रेज सरकार के खिलाफ असहयोग का रास्ता अपनाया, और यह उनकी पहली असहयोग आधारित लड़ाई मानी जाती है।इसी दौर में अहमदाबाद के कपड़ा मिल मजदूरों ने बेहतर वेतन की मांग को लेकर आंदोलन छेड़ा। गांधीजी ने मजदूरों के समर्थन में भूख हड़ताल की, और यह मालिकों व मजदूरों के बीच समझौते का रास्ता बनाकर एक मिसाल कायम कर गया।जलियांवाला बाग हत्याकांड और रॉलेट एक्ट के विरोध में गांधीजी ने 1920 में असहयोग आंदोलन शुरू किया। इसमें ब्रिटिश सामान, स्कूल, कॉलेज और नौकरियों का बहिष्कार किया गया, और इसी दौर में खिलाफत आंदोलन के साथ हिंदू-मुस्लिम एकता भी मजबूत हुई।5 फरवरी 1922 को उत्तर प्रदेश के चौरी चौरा में हिंसा भड़कने और 23 पुलिसकर्मियों की मौत के बाद गांधीजी ने अहिंसा के सिद्धांत पर टिके रहते हुए असहयोग आंदोलन को वापस ले लिया, भले ही यह फैसला विवादास्पद रहा।12 मार्च 1930 को गांधीजी ने साबरमती आश्रम से करीब 390 किलोमीटर की पैदल यात्रा शुरू की और 6 अप्रैल को दांडी पहुंचकर नमक कानून तोड़ा। यह सविनय अवज्ञा आंदोलन देशभर में फैल गया और ब्रिटिश सरकार के खिलाफ जन आंदोलन का बड़ा प्रतीक बना।दांडी मार्च के बाद मार्च 1931 में गांधी-इरविन समझौता हुआ, जिसके तहत सत्याग्रहियों को रिहा किया गया। इसके बाद गांधीजी लंदन में गोलमेज सम्मेलन में भारत की आवाज बनकर शामिल हुए।1930 के दशक में गांधीजी ने छुआछूत के खिलाफ व्यापक मुहिम चलाई और "हरिजन" साप्ताहिक की शुरुआत की। उन्होंने देशभर का दौरा कर दलितों के अधिकारों और सामाजिक समानता के लिए जनजागरण किया।8 अगस्त 1942 को बॉम्बे के गोवालिया टैंक मैदान में "करो या मरो" के नारे के साथ भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हुआ। यह गांधीजी के नेतृत्व में चला अंतिम और सबसे बड़ा जन आंदोलन था, जिसने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी।