आषाढ़ी एकादशी पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पंढरपुर में भगवान विट्ठल-रुक्मिणी की शासकीय महापूजा की।
आषाढ़ी एकादशी के पावन अवसर पर होने वाली पंढरपुर वारी महाराष्ट्र का बहुत पवित्र और भक्ति उत्सव है। इस दिन लाखों वारकरी विट्ठल-रुक्मिणी के दर्शन के लिए पैदल पंढरपुर आते हैं। आज इसी इस पावन अवसर पर पंढरपुर के विट्ठल-रुक्मिणी महापूजा हुई।आषाढ़ी एकादशी पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पंढरपुर में भगवान विट्ठल-रुक्मिणी की शासकीय महापूजा की। विधि-विधान से शासकीय महापूजा संपन्न होने के बाद, भगवान विट्ठल और माता रुक्मिणी की आरती की गई और उनके चरणों में श्रद्धापूर्वक नमन कर आशीर्वाद प्राप्त किया गया।मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यह एक बहुत ही खास मौका था, जो लाखों वारकरियों की आस्था और भक्ति, और भगवान विट्ठल के नाम के लगातार जाप से भरा हुआ था। आज मुझे अपनी पत्नी के साथ पंढरपुर के पवित्र स्थान पर भगवान विट्ठल और माता रुक्मिणी की महापूजा करने का सौभाग्य मिला। भगवान विट्ठल के चरणों में बिताया गया हर पल शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। मैंने भगवान विट्ठल के चरणों में सच्चे मन से प्रार्थना की।मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पंढरपुर में वारकरी दंपति बालासाहेब माने और प्रभावती माने को सम्मानित किया। आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर वारकरी बालासाहेब माने को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित करते महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद फडणवीस।मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस अवसर पर वारकरी दंपति बालासाहेब माने और प्रभावती माने को 'श्री विट्ठल निर्मल दिंडी अवॉर्ड 2026' दिया।पंढरपुर में शासकीय पूजा के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस व अमृता फडणवीस को वारिकरियों के ओर से भगवान विट्ठल और माता रुक्मिणी की प्रतिमा भेंट की है।पंढरपुर में आषाढ़ी एकादशी के पावन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वारकारियों को संबोधित भी किया।मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संत ज्ञानेश्वर माऊली की चरण पादुका का दर्शन किया। इस अवसर उन्होंने प्रार्थना की कि राज्य के बलिराजा खुश रहें और सभी नागरिकों की इच्छाएं पूरी हों।