गुच्छी मशरूम फोटो.सोशल मीडिया
BRICS के मेन्यू में गुच्छी
BRICS 2026 के गाला डिनर में गुच्छी मार्मिक नाम की हिमालय की एक बेहद दुर्लभ मशरूम परोसी गई। हिमालयी मोरेल यानी गुच्छी में मेडिसिनल प्रॉपर्टीज पाई जाती हैं, जो इसे बेहद खास और महंगा बनाती है।
गुच्छी कैसी होती है?
गुच्छी को अंग्रेजी में Morel Mushroom कहा जाता है और यह Morchella प्रजाति का होता है। इसकी सबसे खास पहचान है इसकी छत्ते जैसी जालीदार टोपी और हल्के रंग का खोखला तना। सामान्य बटन या ऑयस्टर मशरूम से इसका रूप और स्वाद दोनों काफी अलग होते हैं।
बाजार में इतनी महंगी क्यों?
गुच्छी की कीमत का सबसे बड़ा कारण है इसका आसानी से न मिलना। इसे आम मशरूम की तरह उगाना संभव नहीं है। पहाड़ी इलाकों में लोग जंगलों में जाकर इसे हाथ से खोजते और इकट्ठा करते हैं। अच्छी क्वालिटी की सूखी गुच्छी की कीमत बाजार में ₹15,000 से ₹40,000 प्रति किलो तक हैं।
स्वाद ही बनाता है इसे खास
गुच्छी का गहरा सोंधा फ्लेवर, खुशबू औऱ स्पॉंजी टेक्स्चर इसे लग्जरी बनाता है। सूखने के बाद इसका अरोमा और फ्लेवर बढ़ जाता है। यही वजह है कि इसे खास मौकों पर फाइन डाइनिंग में इस्तेमाल किया जाता है।
BRICS की थाली तक
ब्रिक्स 2026 के डिनर मेन्यू में गुच्छी मार्मिक एस्पैरगस के साथ मिलाकर तैयार किया गया था। इसमें केसर, किशमिश और मामरा बादाम का भी इस्तेमाल किया गया था। गुच्छी में प्रोटीन, डायटरी फाइबर और कुछ एंटी ऑक्सीडेंट कंपाउंड पाए जाते हैं। इसमें vitamin D भी पाई जाती है।
जंगल से रसोई तक कैसे पहुंचती है?
गुच्छी को अक्सर सुखाकर सुरक्षित रखा जाता है, जिससे इसे लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सके। इसे सुखाकर रखने की परंपरा है। इसकी खास खुशबू इसे ग्रेवी, चावल, सॉस और दूसरे व्यंजनों के लिए खास बनाती है।