क्लीन इटिंग- फल और सब्ज़ियाँ खरीदते समय ऑर्गेनिक लेने की कोशिश करें। ऑर्गेनिक चीजों को उगाने से पर्यावरण और जलवायु की भी रक्षा होती है। साथ ही इससे किसानों की भी मदद होती है। इससे दुनिया भर में उपज को लाने-ले जाने से होने वाले उत्सर्जन को कम करने में भी मदद मिलेगी।ग्रीन एनर्जी- ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का सबसे बड़ा कारण ऊर्जा का इस्तेमाल ही है। दुनिया भर में होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का लगभग दो-तिहाई हिस्सा ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ा है। ग्रीन इलेक्ट्रिसिटी अपनाने से कोयले के इस्तेमाल को धीरे-धीरे खत्म किया जा सकता है। इससे सीधे तौर पर CO2 उत्सर्जन कम होगा।डिजिटल फुटप्रिंट- आप जितनी बार सर्च इंजन में कुछ ढुंढते हैं, ईमेल भेजते या रिसीव करते हैं, गाना सुनते हैं, उतनी बार कार्बन का उत्सर्जन होता है। क्यों कि जो भी डेटा हम खर्च कर रहे हैं, उसे बनाने में बहुत सारी ऊर्जा लगती है। डिजिटल टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से होने वाला CO2 उत्सर्जन एविएशन इंडस्ट्री से भी ज़्यादा हो गया है।सेव एनर्जी- डे टुडे लाइफ की चीजों में एनर्जी बचाने की कोशिश करें। जैसे- हीटिंग और कूलिंग का इस्तेमाल कम करें, LED लाइट का इस्तेमाल करें, इस्तेमाल न होने वाले इलेक्ट्रॉनिक सामान को अनप्लग करें ताकि वैम्पायर पावर की बर्बादी न हो। साथ ही जब भी कोई नया उपकरण खरीदें, तो एनर्जी एफिशिएंट का ही चुनाव करें। प्लास्टिक- जब भी आपको मौका मिलें, आप प्लास्टिक के इस्तेमाल से बचें। प्लास्टिक सड़कों से लेकर नदियों में, समुद्र के किनारे, कॉस्मेटिक्स में, गंदे पानी में, हमारे कपड़ों में और यहाँ तक कि हम जो हवा में साँस लेते हैं, उसमें भी। जलवायु परिवर्तन और प्लास्टिक एक वैश्विक समस्या हैं, जो हमारे जीवन चक्र पर गहरा असर छोड़ता है। डेली ट्रांसपोर्टेशन- रोज़ाना आने-जाने के तरीके को बेहतर बनाना भी पर्यावरण की दिशा में एक कदम हो सकता है। जब भी हो सके, अकेले कार से जाने के बजाय पैदल चलें, साइकिल चलाएँ या पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें। अगर आपको गाड़ी चलानी ही है, तो कारपूलिंग करने या इलेक्ट्रिक गाड़ी (EV) इंवायरनमेंट फ्रेंडली उपाय हैं।