यवतमाल बांध प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया) 
यवतमाल

यवतमाल में बढ़ा जलसंकट का खतरा, 73 जल परियोजनाओं में केवल 33.70% जलसंग्रह शेष

Yavatmal Water Crisis: यवतमाल में मानसून में देरी और 41°C तापमान से जलसंकट गहराया। 73 परियोजनाओं में महज 33.70% पानी शेष है, जिससे ग्रामीण इलाकों और मवेशियों पर संकट मंडरा रहा है।

केतकी मोडक

Irrigation Projects Water Storage In Yavatmal: यवतमाल मृग नक्षत्र शुरू हुए एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जिले में अब तक अच्छी बारिश नहीं हुई है। दूसरी ओर लगातार बढ़ते तापमान ने जलसंकट को और गंभीर बना दिया है। जिले के 73 छोटे-बड़े जल परियोजनाओं में वर्तमान में केवल 33.70 प्रतिशत जलसंग्रह शेष है। यदि मानसून और अधिक विलंबित होता है, तो आने वाले दिनों में पेयजल संकट और गहरा सकता है।

जिले में 3 बड़े, 7 मध्यम तथा 63 लघु सिंचन परियोजनाएं हैं। वर्तमान स्थिति में अधिकांश जलाशयों में सीमित जलसंग्रह बचा है। बड़े परियोजनाओं में कुल 34.90 प्रतिशत, मध्यम परियोजनाओं में 43.53 प्रतिशत तथा 63 लघु परियोजनाओं में मात्र 22.57 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। विभिन्न परियोजनाओं में कारंजा स्थित अडाण परियोजना में सर्वाधिक 48.37 प्रतिशत जलसंग्रह दर्ज किया गया है।

यह परियोजना वाशीम जिले के कारंजा तहसील में स्थित है, लेकिन इसका पानी यवतमाल जिले के दारव्हा सहित कई क्षेत्रों की प्यास बुझाता है। वहीं यवतमाल तहसील की बोरगांव परियोजना में केवल 27.72 प्रतिशत जलसंग्रह बचा है। जून का महीना आधा बीत चुका है, लेकिन बारिश के कोई ठोस संकेत दिखाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे में जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। पिछले वर्ष इसी अवधि में जिले के बड़ी, मध्यम और लघु परियोजनाओं में कुल जलसंग्रह 27.47 प्रतिशत था।

बढ़ते तापमान से तेजी से हो रहा वाष्पीकरण

जिले में तापमान लगातार 40 से 41 °C के बीच बना हुआ है। भीषण गर्मी के कारण जलाशयों में पानी का वाष्पीकरण तेजी से हो रहा है। इसका असर ग्रामीण क्षेत्रों की बोरवेल और कुओं पर भी दिखाई दे रहा है।

63 लघु परियोजनाओं में केवल 22.57% पानी

यवतमाल जिले की 63 लघु सिंचन परियोजनाओं में केवल 22.57 प्रतिशत जलसंग्रह शेष है। इनमें से कई परियोजनाएं लगभग सूखने की स्थिति में पहुंच गई हैं। ग्रामीण पेयजल योजनाएं बड़े पैमाने पर इन परियोजनाओं पर निर्भर हैं। ऐसे में कई गांवों में पेयजल संकट गहराने लगा है। पशुओं को भी पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।

परियोजनाओं में जलसंग्रह (प्रतिशत में)

परियोजना का नाम जलसंग्रह (%)
पूस 33.90%
अरुणावती 38.00%
बेबला 30.97%
गोकी 36.95%
वाघाड़ी 45.28%
सायखेडा 47.46%
अधरपूस 44.09%
बोरगांव 27.72%
अडाण 48.37%
नवरगांव 33.25%

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