प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स- सोशल मीडिया) 
यवतमाल

यवतमाल के उमरगांव में गहराया जलसंकट, ग्रामीण 2.5 किमी दूर से ला रहे पानी

Yavatmal Water Crisis: यवतमाल जिले के उमरगांव में भीषण गर्मी के कारण पेयजल के मुख्य स्रोत सूख गए हैं, जिससे ग्रामीणों को पानी के लिए 2.5 किलोमीटर दूर तक भटकना पड़ रहा है।

केतकी मोडक

Yavatmal Gram Panchayat Administration Negligence Drinking Water Supply: यवतमाल तालुका के अंतर्गत आने वाले ग्राम उमरगांव के नागरिक पिछले एक महीने से भीषण जलसंकट का सामना कर रहे हैं। इस क्षेत्र की नल जल योजना के मुख्य कुएं पूरी तरह से सूख जाने के कारण बेलोरी और उमरगांव में गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है। भीषण तपन के बीच पानी के लिए तरस रहे ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन से तत्काल प्रभाव से वैकल्पिक उपाय योजना करने की पुरजोर मांग की है।

उमरगांव लगभग 200 से 250 की आबादी वाला एक छोटा सा गांव है, जहां आदिवासी समुदाय की संख्या सबसे अधिक है। इस वर्ष मार्च महीने से ही रिकॉर्ड तोड़ भीषण गर्मी शुरू होने के कारण यहां जलसंकट लगातार गहराता चला गया। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि स्थानीय ग्राम पंचायत प्रशासन की घोर उदासीनता और लापरवाही के कारण ही आज उन्हें इस गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

किसानों द्वारा तालाब का पानी खींचने से सूखे पेयजल स्रोत

भौगोलिक स्थिति के अनुसार, गांधीनगर, बेलोरी और उमरपोड ये तीनों ही गांव एक ही समूह ग्राम पंचायत के अंतर्गत आते हैं। बेलोरी और उमरपोड के ठीक बीच स्थित जल संग्रहण का मुख्य तालाब इस वर्ष समय से काफी पहले ही पूरी तरह सूख गया। इसके चलते तालाब के आसपास बने पेयजल के कुओं को पर्याप्त भूजल स्रोत नहीं मिल पाए।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इस तालाब के पानी को स्थानीय किसानों द्वारा भारी हॉर्सपावर के मोटर पंपों के माध्यम से बड़े पैमाने पर खेतों की सिंचाई के लिए उपयोग किया गया। पानी के इस अंधाधुंध दोहन के कारण ही पेयजल आपूर्ति वाले मुख्य कुएं और सरकारी हैंडपंप भी समय से पहले पूरी तरह सूख गए हैं।

वर्तमान में उमरगांव में केवल एक ही हैंडपंप चालू स्थिति में है, लेकिन भूजल स्तर नीचे जाने के कारण उसमें से भी पर्याप्त पानी नहीं आ रहा है। इसके चलते मजबूर होकर ग्रामीणों को प्रतिदिन 2 से 2.5 किलोमीटर दूर जंगलों व अन्य स्थानों पर पैदल जाकर पानी ढोकर लाना पड़ रहा है।

45 डिग्री तापमान के बीच दूर से पानी लाना बेहद जोखिम भराृ

गर्मी के इस सीजन में आम नागरिकों को कपड़े धोने, बर्तन साफ करने, घरों की नियमित सफाई तथा पशुओं की प्यास बुझाने के लिए पानी की आवश्यकता आम दिनों से कहीं अधिक होती है। ऐसे संकट के समय में हैंडपंप से पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण ग्रामीणों को दिन-रात भारी मानसिक और शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इतनी गंभीर जल समस्या होने के बावजूद स्थानीय प्रशासन की ओर से अब तक राहत पहुंचाने वाला कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे ग्रामीणों में ग्राम पंचायत के प्रति तीव्र नाराजगी व्याप्त है। वर्तमान में यवतमाल जिले का अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुंच चुका है। ऐसी झुलसाने वाली भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच इतनी दूर-दूर से पानी लाना ग्रामीणों के स्वास्थ्य के लिए बेहद जोखिम भरा और कठिन कार्य बन गया है।

ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से ग्राम पंचायत एवं उच्च प्रशासन से मांग की है कि बेलोरी और उमरपोड क्षेत्र में टैंकर या अन्य माध्यमों से तत्काल वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, ताकि त्रस्त लोगों को इस भीषण जलसंकट से तुरंत राहत मिल सके।

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