Yavatmal ST Bus Fare: महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल (एसटी) की ओर से महिलाओं को 'महिला सम्मान योजना' के तहत 50 प्रतिशत किराया रियायत, 75 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को 'अमृत ज्येष्ठ नागरिक योजना' के अंतर्गत निःशुल्क यात्रा, छात्राओं के लिए अहिल्याबाई होकर पास तथा दिव्यांग यात्रियों को विशेष यात्रा छूट जैसी कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की गई हैं।
इन योजनाओं की व्यापक सराहना हो रही है, लेकिन दूसरी ओर इन रियायतों का अप्रत्यक्ष आर्थिक बोझ बिना किसी छूट के यात्रा करने वाले सामान्य यात्रियों पर पड़ने का आरोप भी लगाया जा रहा है। यात्रियों का कहना है कि एक हाथ से रियायत और दूसरे हाथ से किराया वृद्धि की नीति अपनाई जा रही है। एसटी प्रशासन ने जनवरी 2025 में डीजल की कीमतों, वाहनों के रखरखाव और महामंडल के आर्थिक घाटे का हवाला देते हुए 14।95 प्रतिशत किराया वृद्धि की थी। इसके बाद महज डेढ़ वर्ष के भीतर एक बार फिर 13.56 प्रतिशत किराया बढ़ा दिया गया।
इस तरह कुल मिलाकर एसटी का किराया लगभग 28 प्रतिशत बढ़ चुका है। इस बढ़ोतरी का सबसे अधिक असर ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों, मजदूरों, दैनिक वेतनभोगियों और छोटे व्यापारियों पर पड़ा है, जिनके लिए एसटी ही आवागमन का सबसे सुलभ साधन है। लगातार बढ़ते किराए से उनके मासिक खर्च पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। यात्रियों का कहना है कि डीजल, स्पेयर पार्ट्स, टायर और कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी से एसटी का खर्च बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन हर बार इसका समाधान किराया बढ़ाना नहीं हो सकता।
यात्री संगठनों ने सवाल उठाया है कि सरकार द्वारा विभिन्न वर्गों के लिए घोषित रियायतों की भरपाई एसटी महामंडल को समय पर मिलती है या नहीं। यदि प्रतिपूर्ति में देरी होती है, तो क्या उसी घाटे की भरपाई के लिए बार-बार सामान्य यात्रियों पर किराया वृद्धि का बोझ डाला जा रहा है? यात्रियों का आरोप है कि सामाजिक योजनाओं का राजनीतिक लाभ सरकार को मिलता है, जबकि आर्थिक भार उन सामान्य यात्रियों को उठाना पड़ता है जिन्हें किसी भी प्रकार की किराया रियायत नहीं मिलती। यही कारण है कि लगातार बढ़ते किराए को लेकर आम यात्रियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ये भी पढ़े: झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए…धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अभिजीत दिपके का पहला बयान
लोक सुझाव है और धिन की दी पर रोक लगाई जाए, एमटी की खाली जमीनों का व्यावसायिक उपयोग किया जाए, पार्सल एवं माल परिवहन सेवाओं का विस्तार किया जाए तथा सरकार रियायती योजनाओं की प्रतिपूर्ति राशि समय पर एमटी को उपलब्ध कराए उनका मानव है कि केवल रियायतों की घोषणा करने के बजाय एसटी की वित्तीय स्थिति मजबूत करने और यात्रियों के लिए संतुलित किराया नीति अपनाने की आवश्यकता है। अन्यथा ग्रामीण क्षेत्रों में निजी परिवहन सेवाओं को बड़ा मिलने की आशंका है।