प्रतीकात्मक तस्वीर (सोशल मीडिया) 
यवतमाल

यवतमाल केदारेश्वर मंदिर विवाद: पुजारी रूपा गिरी को कोर्ट से बड़ी राहत, नगर परिषद के अतिक्रमण नोटिस पर लगा स्टे

Yavatmal News: यवतमाल कोर्ट ने केदारेश्वर मंदिर के पुजारी परिवार को अतिक्रमण नोटिस से राहत देते हुए नगर परिषद की कार्रवाई पर मालिकना हक के दस्तावेजों के आधार पर रोक लगा दी है।

केतकी मोडक

Yavatmal Kedareshwar Temple Dispute: यवतमाल के ऐतिहासिक केदारेश्वर मंदिर परिसर में निवास करने वाली पुजारी रूपा गिरी और उनके परिवार के लिए न्यायपालिका से एक सुखद खबर सामने आई है। यवतमाल के वरिष्ठ स्तर सिविल कोर्ट ने नगर परिषद द्वारा जारी किए गए अतिक्रमण हटाने संबंधी नोटिस पर स्टे ऑर्डर प्रदान कर दिया है। इस न्यायिक आदेश के बाद नगर परिषद की प्रस्तावित कार्रवाई पर फिलहाल रोक लग गई है, जिससे पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है। यह मामला यवतमाल शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर मंदिर परिसर और वर्षों से रह रहे पुजारी परिवार के अधिकारों का प्रश्न जुड़ा था।

अतिक्रमण के आरोपों पर कोर्ट ने खंगाले दस्तावेज, प्रशासन को लगा झटका

इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब यवतमाल नगर परिषद प्रशासन ने बीते 10 अप्रैल को पुजारी रूपा गिरी को एक आधिकारिक नोटिस थमाया। इस नोटिस में प्रशासन ने गंभीर आरोप लगाया था कि उनके आवास का कुछ हिस्सा पास के नाले पर अतिक्रमण कर बनाया गया है। नगर परिषद ने रूपा गिरी को अल्टीमेटम दिया था कि वे सात दिनों के भीतर इस कथित अतिक्रमण को स्वयं हटा लें, अन्यथा प्रशासन बलपूर्वक कार्रवाई करेगा और इसका खर्च भी उन्हीं से वसूला जाएगा। प्रशासन की इस अचानक हुई कार्रवाई और नोटिस से पुजारी परिवार के सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो गया था। नगर परिषद के इस कड़े रुख के खिलाफ रूपा गिरी ने न्याय का दरवाजा खटखटाया और अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से दीवानी न्यायालय में नियमित दावा दायर किया। सुनवाई के दौरान, न्यायालय ने पाया कि नगर परिषद ने नोटिस जारी करने से पहले उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया था। कोर्ट में यह बिंदु मजबूती से उठाया गया कि प्रशासन ने यह स्पष्ट रूप से जांच ही नहीं की थी कि संबंधित निर्माण वास्तव में नाले की सीमा में आता है या नहीं। इस संबंध में नगर परिषद की ओर से कोई ठोस तकनीकी दस्तावेज या सटीक सीमांकन रिपोर्ट भी प्रस्तुत नहीं की जा सकी, जिससे प्रशासन का पक्ष कमजोर नजर आया।

पुजारी पक्ष की प्रभावी पैरवी और स्वामित्व के पुख्ता प्रमाणों की जीत

न्यायालय की कार्यवाही के दौरान रूपा गिरी की ओर से अधिवक्ता रंजित अगमे और अधिवक्ता निखिल सायरे ने अत्यंत प्रभावी ढंग से दलीलें पेश कीं। बचाव पक्ष ने कोर्ट के समक्ष भूमि स्वामित्व (Land Ownership) से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज, घर के नक्शे, वर्षों पुराने फोटोग्राफ और अन्य कानूनी कागजात प्रस्तुत किए। इन दस्तावेजों ने यह साबित करने में मदद की कि निर्माण वैध है और परिवार वहां लंबे समय से निवास कर रहा है। याचिकाकर्ता को इस कानूनी लड़ाई में अधिवक्ता रवि कुकड़े, भावेश श्रीराव, पायल मुनेश्वर और प्रकृति मेश्राम का भी महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ।

न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 27 अंतरिम आवेदनों को स्वीकार किया और माना कि प्राथमिक तौर पर नगर परिषद की नोटिस की कार्रवाई पर रोक लगाना आवश्यक है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक मामले की पूरी जांच और स्वामित्व का स्पष्ट निर्धारण नहीं हो जाता, तब तक किसी भी निर्माण को ढहाया नहीं जा सकता। इस आदेश के साथ ही नगर परिषद के 'बुलडोजर' पर ब्रेक लग गया है। हालांकि, मुख्य मामले की सुनवाई अभी जारी रहेगी, लेकिन इस अंतरिम राहत ने पुजारी परिवार को अपनी बात साबित करने के लिए जरूरी समय और सुरक्षा प्रदान कर दी है।

बद्रीनाथ-ऋषिकेश हाईवे पर मुश्किल में फंसे तीर्थयात्री! भारी बारिश से गिरा चट्टान, इलाके में रेड अलर्ट जारी

SIR Controversy: चुनाव आयोग पर सवाल उठाने पर भड़कीं CM रेखा गुप्ता, बोलीं- लोकतंत्र को कमजोर कर रहा विपक्ष

Ram Mandir: चंपत राय को भेजा था ₹2.25 लाख का VIDEO, SIT चार्जशीट में क्या-क्या? राम मंदिर में NSG कमांडो तैनात

PM Modi Mann Ki Baat Live: मन की बात का 138वां कार्यक्रम, आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस की नीति

Faridabad: नमो मैराथन में उमड़ा 1.35 लाख युवाओं का सैलाब, CM नायब सैनी और शिखर धवन ने दिखाई हरी झंडी