हेमाडपंथी मंदिरों (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
यवतमाल

महाराष्ट्र की प्राचीन धरोहरों को मिलेगी नई पहचान! 50 मंदिरों पर राज्य सरकार बनाएगी बिग बजट फिल्म

Maharashtra Documentary: यवतमाल के 4 प्राचीन हेमाडपंथी शिव मंदिरों पर राज्य सरकार 4.62 करोड़ की डॉक्यूमेंट्री बनाएगी। 50 तीर्थ स्थलों के फिल्मांकन से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

प्रिया जैस

Yavatmal Temples: यवतमाल जिले को हेमाडपंथी मंदिरों का विशाल ऐतिहासिक धरोहर प्राप्त है। अब यही ऐतिहासिक धरोहर पूरे महाराष्ट्र और विदेशों से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करेगी। राज्य सरकार ने प्राचीन मंदिरों पर डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाने का निर्णय लिया है और इसके लिए 4.62 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी भी दी गई है। विशेष रूप से, इसमें जिले के चार प्राचीन शिव मंदिरों पर विशेष फोकस रहेगा।

अद्वितीय स्थापत्य शैली के कारण लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करने वाले हेमाडपंथी मंदिर यवतमाल जिले की खास पहचान हैं। इस धरोहर को दुनिया तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार के पर्यटन एवं सांस्कृतिक कार्य मंत्रालय ने पहल की है। इस डॉक्यूमेंट्री से यवतमाल जिले के प्राचीन मंदिरों का महत्व दुनिया को ज्ञात होगा।

राज्य के 50 तीर्थ स्थलों पर डॉक्यूमेंट्री

साथ ही, मंदिरों के माध्यम से जिले के आसपास के टिपेश्वर अभयारण्य, पैनगंगा अभयारण्य और अन्य पर्यटन स्थलों की जानकारी भी व्यापक रूप से पहुंचेगी। यवतमाल जिले के चार प्राचीन मंदिरों के साथ राज्य के 50 तीर्थ स्थलों पर डॉक्यूमेंट्री निर्माण करने का निर्णय सरकार ने लिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 3 दिसंबर को प्रशासनिक मंजूरी दी गई। इसके साथ ही 4.62 करोड़ रुपये की निधि को भी मंजूरी दी गई है। पर्यटन और सांस्कृतिक कार्य विभाग ने इस संबंध में विस्तृत आदेश जारी किए हैं। इनमें यवतमाल के अलावा विदर्भ के कई अन्य मंदिर शामिल हैं।

राज्य के इन मंदिरों का होगा फिल्मांकन

इनमें अमरावती जिले के खंडेश्वर (नांदगांव खंडेश्वर), बुलडाणा जिले के शिव मंदिर (धोत्रा नांदाई, तहसील देऊलगाव राजा), वैष्णव मंदिर (कोठाली, तहसील पिंपलगाव राजा), सदाशिव मंदिर-बुधनेश्वर (मढ, तहसील बुलडाणा), वाशीम शहर का बालाजी मंदिर, भंडारा जिले का वालकेश्वर मंदिर (तहसील मोहाडी) शामिल हैं।

  • 50 तीर्थ स्थलों पर राज्य में काम
  • 4.62 करोड़ रुपये को मिली मंजूरी

पुरातत्व विभाग करेगा नियंत्रण

सूचना एवं जनसंपर्क महासंचालय द्वारा निर्धारित कार्यप्रणाली के अनुसार इस डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया जाएगा। पुरातत्व विभाग के निदेशकों को इस परियोजना का नियंत्रण अधिकारी घोषित किया गया है। इस डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से जिले की समृद्ध सांस्कृतिक और स्थापत्य धरोहर देश-विदेश के पर्यटकों तक पहुंचेगी।

लोहारा, नेर, दारव्हा, चिकनी में होगी शूटिंग

यवतमाल जिले के लोहारा स्थित कमलेश्वर शिवमंदिर, नेर तहसील के पिंपरी कलगा का शिवमंदिर, दारव्हा तहसील के लाडखेड़ का दक्षेश्वर मंदिर और चिकनी खुर्द का शिवमंदिर इस डॉक्यूमेंट्री में शामिल होंगे। जल्द ही यहां फिल्मांकन शुरू होगा। लोहारा का शिवमंदिर लगभग 1100 साल पुराना है।

जिले के पर्यटन क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा

सरकार का यह निर्णय बहुत ही अच्छा है। इस डॉक्यूमेंट्री से जिले के पर्यटन क्षेत्र को और बढ़ावा मिलेगा। जिले के ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचेगी। संबंधित विभाग से मैं इस विषय में और जानकारी लूंगा।

  • विकास मीना, जिलाधिकारी, यवतमाल

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