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उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अमरावती विभागीय शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव के सिलसिले में शिक्षक मतदाताओं से संवाद किया।
1 नवंबर 2005 से पहले सेवा में आए पात्र शिक्षकों और कर्मचारियों की पेंशन संबंधी मांग पर चर्चा हुई।
शिक्षकों ने रुकी हुई अनुदान किस्तों, वेतन अनुदान और शिक्षक भर्ती जारी रखने जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी।
Amravati Teacher Constituency Election: अमरावती विभागीय शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव प्रचार ने जोर पकड़ लिया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने यवतमाल में शिक्षक मतदाताओं से संवाद करने के लिए पहुंचे, परंतु इस सभा में केवल चुनावी जीत की रणनीति ही नहीं, बल्कि पुरानी पेंशन, वेतन अनुदान, शिक्षक भर्ती और मराठी स्कूलों के अस्तित्व जैसे लंबे समय से लंबित मुद्दे भी प्रमुखता से उठे।
एम.डब्ल्यू. पैलेस में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री संजय राठोड, मंत्री अशोक उईके, सांसद संजय देशमुख, विधायक राजू तोडसाम, विधायक भावना गवली, वसंतराव घुईखेडकर, प्रवीण देशमुख, नितिन भूतडा, एड. प्रियदर्शिनी उईके सहित महायुति के पदाधिकारी और शिक्षक मतदाता उपस्थित थे। पालकमंत्री संजय राठोड ने प्रस्तावना रखी।
उम्मीदवार ने 1 नवंबर 2005 से पहले से सेवा में कार्यरत पात्र शिक्षक एवं कर्मचारियों की पेंशन का प्रश्न, लंबित वेतन अनुदान, अनुदान की रुकी हुई किस्तों, शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार, शिक्षक भर्ती जारी रखने और क मराठी स्कूलों को बंद होने से बचाने जैसे मुद्दों पर काम करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या कम न हो और शिक्षक-कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान हो, इसके लिए प्रयास किए जाएंगे।
मंत्री अशोक उईके ने कहा कि शिक्षक देश के भविष्य का निर्माण करने वाले महत्वपूर्ण घटक हैं। वसंतराव घुईखेडकर ने राष्ट्रवादी कांग्रेस की महायुति के साथ भूमिका स्पष्ट की। शिंदे ने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं को सरकार के माध्यम से हल किया जाएगा और शैक्षणिक कार्यों के लिए निधि की कमी नहीं होने दी जाएगी।
पुरानी पेंशन, लंबित अनुदान, अपर्याप्त शिक्षक भर्ती और बंद होने की कगार पर पहुंच चुके मराठी स्कूलों की समस्याएं आज भी कायम हैं। ऐसे में इस चुनाव में केवल सत्ता का समर्थन, नेताओं की भीड़ और जीत के दावे पर्याप्त नहीं होंगे।