डॉ. निमिष धुलधुले (सोर्स- फोटो नवभारत) 
यवतमाल

यवतमाल: बरसात में संक्रामक रोगों से बचाव की अपील, स्वास्थ्य अधिकारी ने नागरिकों को दी सावधानी बरतने की सलाह

Yavatmal Monsoon: तालुका स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. निमिष धुलधुले ने बरसात में संक्रामक रोगों से बचाव के लिए पानी‑स्रोत शुद्धिकरण, कचरा निपटान व त्वरित जांच की अपील की।

केतकी मोडक

Yavatmal Monsoon Disease Prevention: यवतमाल जिले के महागांव तालुका में विलंब से ही सही, लेकिन आखिरकार बारिश की शुरुआत हो चुकी है। वर्तमान में बरसात के मौसम में तेजी से फैलने वाले संक्रामक रोगों के खतरे से बचने के लिए आम नागरिकों, नगर पंचायत और ग्राम पंचायत प्रशासन को आवश्यक सावधानियां बरतनी चाहिए, ऐसा आह्वान तालुका स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. निमिष धुलधुले ने किया है।

राष्ट्रीय कीटजन्य रोग नियंत्रण और मलेरिया जनजागरण अभियान के अंतर्गत तथा संक्रामक रोग प्रतिबंधात्मक उपायों के तहत तालुका के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, उपकेंद्रों और गांवों में बड़े पैमाने पर जनजागृति की जा रही है। प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग और कचरे का उचित प्रबंधन न होने के कारण गंदे पानी का निकास बाधित हो रहा है, जिससे मच्छरों की उत्पत्ति बढ़ रही है। इसलिए घरों के आसपास जमा हुआ पानी, गड्ढे, नालियां और गटर साफ रखना बेहद आवश्यक है, ऐसा उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा।

नागरिकों को बरसात में संक्रामक रोगों के खतरे से बचाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में कचरा और गोबर के ढेर, जो गांव के आसपास बड़ी मात्रा में दिखाई देते हैं, उनकी उचित निपटान व्यवस्था कर गांव और परिसर को स्वच्छ रखना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही, पीने के पानी के स्रोतों को नियमित रूप से ब्लीचिंग पाउडर से शुद्ध किया जाना चाहिए। सार्वजनिक जलस्रोतों के परिसर को स्वच्छ रखने के साथ-साथ हर ग्राम पंचायत को अपने पास कम से कम तीन महीने का ब्लीचिंग पाउडर का अग्रिम भंडार (स्टॉक) उपलब्ध रखना चाहिए, ऐसे कड़े निर्देश दिए गए हैं।

कुओं में बाढ़ का दूषित पानी

डॉ. धुलधुले ने आगे बताया कि कोई भी बुखार मलेरिया हो सकता है। इसलिए बुखार आने पर लापरवाही न बरतते हुए तुरंत सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर रक्त की जांच करानी चाहिए। नल के लीकेज और जलापूर्ति व्यवस्था के रिसाव को तुरंत दुरुस्त किया जाना चाहिए। नदी और नालों के किनारे स्थित कुओं में बाढ़ का दूषित पानी न घुसे, इसके लिए आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय करने चाहिए।

बरसात के दिनों में बासी भोजन, सड़ी हुई सब्जियां, दूषित मांस और मछली का सेवन करने से बचना चाहिए। हमेशा शुद्ध और उबला हुआ पानी ही पीने के लिए उपयोग में लाना चाहिए, जिससे गैस्ट्रो, दस्त और पीलिया जैसी जलजन्य (पानी से फैलने वाली) बीमारियों से बचाव संभव हो सके। गांव-गांव में ढिंढोरा (डुग्गी) पिटवाकर और अन्य माध्यमों से ग्रामीणों में जनजागृति करने का आह्वान भी किया गया है।

अति जोखिम वाले गांवों की सूची तैयार

तालुका स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय ने क्षेत्र के अति जोखिम वाले (हाई-रिस्क) गांवों की सूची तैयार कर ली है। संभावित प्राकृतिक आपदा व संक्रामक रोगों के फैलने की स्थिति में सभी स्वास्थ्य कर्मियों को अनिवार्य रूप से अपने मुख्यालय में उपस्थित रहकर तत्परता से सेवा देने के निर्देश दिए गए हैं। इस दौरान छोटे बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं [Omitted] प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध रखने पर विशेष जोर दिया गया है।

बदलते मौसम और आपदा संबंधी पूर्व सूचनाओं को ध्यान में रखते हुए किसानों को कृषि कार्य करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। विशेषकर आकाशीय बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए सभी को सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए, ऐसा आह्वान तालुका स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. निमिष धुलधुले ने किया है।

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