Yavatmal Modern Artificial Modular Legs Camp: यवतमाल जिले में दिव्यांगों को आधुनिक कृत्रिम अंग उपलब्ध कराने के लिए विशेष शिविर आयोजित किया जा रहा है। ऑयल एंड नेचुरल गैस कंपनी (ONGC) की CSR निधि, वीरशैव हितवर्धक मंडल के सहयोग और दिव्यांग केंद्र, पुणे की पहल से 300 दिव्यांगों को आधुनिक कृत्रिम मॉड्यूलर पैर, हाथ और पोलियो कैलिपर निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे।
इसके लिए रविवार, 6 सितंबर को महात्मा बसवेश्वर भवन, दारव्हा रोड, लोहारा, यवतमाल में माप लेने का शिविर होगा। शिविर में कृत्रिम अंगों के लिए आवश्यक माप लेने के साथ लाभार्थियों की जरूरत के अनुसार प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
वीरशैव हितवर्धक मंडल, यवतमाल के अध्यक्ष डॉ. जयेश हातगांवकर ने उपस्थित लोगों का स्वागत किया। प्रा. डॉ. रविकांत कोल्हे, अमरावती, पूर्व संचालक गेल इंडिया लिमिटेड ने शिविर की प्रस्तावना रखी।
दिव्यांग केंद्र, पुणे के प्रमुख एवं विश्वस्त विनय खटावकर ने शिविर की योजना और आधुनिक कृत्रिम मॉड्यूलर पैर की विशेषताओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ऐसे कृत्रिम पैर की बाजार कीमत 50 हजार रुपये से अधिक होती है, जबकि कृत्रिम हाथ की कीमत करीब 25 हजार रुपये तक है। शिविर के माध्यम से ये कृत्रिम अंग 300 दिव्यांगों को पूरी तरह निःशुल्क दिए जाएंगे।
खटावकर के अनुसार आधुनिक मॉड्यूलर पैर पारंपरिक जयपुर फुट की तुलना में हल्के होते हैं और इनमें ऑटोफोल्ड तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इन्हें लगाने के बाद दिव्यांगों को चलने के साथ दौड़ने, तैरने, छलांग लगाने, वाहन चलाने और खेती जैसे कई दैनिक कार्य करने में सुविधा मिल सकती है।
कृत्रिम अंग लगाने के बाद लाभार्थियों को विशेषज्ञों की ओर से आवश्यक प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी दिया जाएगा। दिव्यांग केंद्र की ओर से हर वर्ष विभिन्न सामाजिक संस्थाओं और कंपनियों की सीएसआर निधि के माध्यम से करीब 5 हजार दिव्यांगों को कृत्रिम अंग उपलब्ध कराने की जानकारी भी दी गई।
शिविर के लिए यवतमाल और आसपास के जिलों के दिव्यांगों से पूर्व पंजीयन कराने की अपील की गई है। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि बिना पूर्व पंजीयन के शिविर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
शिविर में दिव्यांगों और उनके साथ आने वाले सहयोगियों के लिए निःशुल्क भोजन और चाय की व्यवस्था रहेगी। यवतमाल एसटी स्टैंड से शिविर स्थल तक पिकअप सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
शिविर समन्वयक अजय मुंदडा ने बताया कि प्रा. डॉ. रविकांत कोल्हे के प्रयासों से ONGC की CSR निधि उपलब्ध हुई है। आयोजकों ने अधिक से अधिक पात्र दिव्यांगों से समय पर पंजीयन कराने की अपील की है।