Yavatmal OBC Organizations: केंद्र सरकार द्वारा आगामी जनगणना को लेकर जारी नई अधिसूचना में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का उल्लेख नहीं किए जाने पर ओबीसी संगठनों ने कड़ी नाराजगी जताई है। संगठनों ने इसे ओबीसी समाज के साथ अन्याय बताते हुए देशभर में तीव्र आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। ओबीसी जनमोर्चा’ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. ज्ञानेश्वर गोरे ने कहा कि किसी भी तकनीकी या प्रशासनिक कारण को आगे किए बिना अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की तर्ज पर ओबीसी, विमुक्त जाति-घुमंतू जनजाति (वीजेएनटी) तथा विशेष पिछड़ा वर्ग (एसबीसी) की भी जातिवार जनगणना कराई जानी चाहिए।
यदि केंद्र सरकार इस मांग को स्वीकार नहीं करती है, तो देशभर में तीव्र जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जनगणना का पहला चरण हाल ही में पूरा हुआ है। इसमें पूछे गए 33 सवालों में 12वां सवाल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित था, लेकिन ओबीसी के लिए अलग से कोई कॉलम नहीं रखा गया था। इससे पहले संसद से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक यह आश्वासन दिया जाता रहा था कि दूसरे चरण में ओबीसी की जातिवार जनगणना की जाएगी।
ओबीसी संगठनों का आरोप है कि 3 अगस्त को जारी केंद्र सरकार की नई अधिसूचना में केवल पहाड़ी क्षेत्रों में जनगणना का उल्लेख किया गया है और ओबीसी की जातिवार जनगणना के मुद्दे को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। इस संबंध में यवतमाल के शासकीय विश्रामगृह में आयोजित पत्रकार परिषद में संगठन के पदाधिकारियों ने अपनी भूमिका स्पष्ट की। इस अवसर पर डॉ. ज्ञानेश्वर गोरे, डॉ. दिलीप घावडे, प्राध्यापक सविता हजारे, प्रा. दीपक वाघ, डॉ. विलास काले, गोविंद चव्हाण और अशोक मोहुरले उपस्थित थे।
पत्रकार परिषद में ओबीसी विद्यार्थियों की समस्याओं को लेकर भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया। पदाधिकारियों ने कहा कि ओबीसी विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में राज्य में करीब 7,200 छात्रावासों की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में केवल 63 छात्रावास संचालित हैं। इसके अलावा ‘महाज्योति’ संस्था के लिए कम से कम 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किए जाने की मांग की गई।
बजट में कटौती के कारण ओबीसी विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति प्रभावित होने का आरोप भी लगाया गया। ओबीसी की जातिवार जनगणना की मांग को जनमानस तक पहुंचाने के उद्देश्य से 3 से 9 अगस्त के बीच ‘मंडल यात्रा’ निकाली गई थी। संगठन ने बताया कि आगामी चरण में पूरे महाराष्ट्र के साथ देशभर में ‘ओबीसी जनजागृति अभियान’ चलाया जाएगा और जातिवार जनगणना की मांग को लेकर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।