महागांव मालेगांव मानकिन्ही का अधूरा पुल (सोर्स - फोटो नवभारत)  
यवतमाल

यवतमाल: मालेगांव-मालकिन्ही पुल निर्माण में देरी, मानसून से पहले ग्रामीणों की बढ़ी चिंता

Bridge Construction Delay: महागांव में वर्षों से अधूरे मालेगांव-मालकिन्ही पुल से 15 गांवों का आवागमन खतरनाक। पिछले साल बाढ़ में फंसे थे 25 छात्र, ग्रामीणों ने PWD से काम पूरा करने की मांग की।

केतकी मोडक

Student Rescue Monsoon Flood In Yavatmal: यवतमाल जिले के महागांव तहसील के मालेगांव मानकिन्ही मार्ग पर स्थित महत्वपूर्ण पुल का निर्माण कार्य पिछले कई वर्षों से अधूरा पड़ा है। संबंधित विभाग की उदासीनता के कारण क्षेत्र के हजारों नागरिकों, विद्यार्थियों और किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आगामी मानसूना को देखते हुए ग्रामीणों में चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि पिछले वर्ष इसी पुल पर बाढ़ का पानी आने से कई छात्र-छात्राएं घंटों फंसे गए थे।

यह पुल मालकिन्ही, मालेगांव, दहिवड, मोहदी, काली (दौ.), चिचपाड, तुलशीनगर, सातघरी, पेढी, पोखरी, घोनसरा, हिवलणी, खेड़ी, वनोली और मालवागद सहित अनेक गांवों को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है। प्रतिदिन किसान, व्यापारी, विद्यार्थी और आम नागरिक इसी रास्ते का उपयोग करते हैं। लेकिन बरसात के दिनों में नदी-नालों में जलस्तर बढ़ने पर पुल के ऊपर से पानी बहने लगता है, जिससे यातायात पूरी तरह प्रभावित हो जाता है।

बीते वर्ष हुई भारी बारिश के दौरान स्कूल से घर लौट रहे लगभग 20 से 25 छात्र-छात्राएं पुल पर पानी भर जाने के कारण बीच रास्ते में फंस गए थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महागांव तहसील प्रशासन ने तत्काल राहत कार्य चलाकर विद्यार्थियों को कासोला मार्ग से निजी वाहनों के माध्यम से सुरक्षित उनके घर पहुंचाया था। उस घटना के बाद भी पुल निर्माण कार्य में अपेक्षित तेजी नहीं आने से ग्रामीणों में नाराजगी है।

ग्रामस्थों ने दी आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों ने मांग की है कि सार्वजनिक निर्माण विभाग पुल निर्माण की वर्तमान स्थिति, मंजूर निधि, कार्य पूर्ण होने की समय-सीमा तथा शेष कार्य का विस्तृत विवरण सार्वजनिक करे। उनका कहना है कि यदि मानसून से पहले पुल का निर्माण पूरा नहीं किया गया तो क्षेत्र के नागरिकों को फिर गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

ग्रामस्थों ने चेतावनी दी है कि प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो व्यापक जनआंदोलन छेड़ा जाएगा। पिछले वर्ष छात्र पुल पर फंसे थे, ऐसे में इस वर्ष कम से कम पुल का निर्माण पूरा होगा या नहीं, यह सवाल पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की निगाहें सार्वजनिक निर्माण विभाग की भूमिका पर टिकी हैं।

जनप्रतिनिधियों व विभाग से हस्तक्षेप की मांग

सामाजिक कार्यकर्ता अमोल भिकन चव्हाण ने कहा कि मालेगांव-मालकिन्ही पुल क्षेत्र के हजारों लोगों की जीवनरेखा है। बरसात में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, किसानों को खाद-बीज लाने और विद्यार्थियों को स्कूल जाने के लिए इसी मार्ग का उपयोग करना पड़ता है। पिछले वर्ष छात्रों के फंसने की घटना दोबारा न हो, इसके लिए मंत्री इंद्रनील नाईक और विधायक किसनराव वानखेडे को पहल करते हुए सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों को तत्काल निर्देश देकर पुल निर्माण कार्य पूरा कराना चाहिए।

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