Sanjay Rathod DPC Rreview Meeting: यवतमाल जिले में पालकमंत्री संजय राठोड की अध्यक्षता में जिला नियोजन समिति की बैठक जिलाधिकारी कार्यालय स्थित नियोजन सभागृह में आयोजित की गई। बैठक में जिले में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और निधि के खर्च की विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान अधिकारियों को मंजूर निधि का प्रभावी उपयोग करते हुए विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
बैठक में आदिवासी विकास मंत्री प्रा. डॉ. अशोक उईके, राज्यमंत्री इंद्रनील नाईक, सांसद संजय देशमुख, नागेश पाटील आष्टीकर और प्रतिभा धानोरकर सहित विधायक धीरज लिंगाडे, दुष्यंत चतुर्वेदी, किसन वानखेडे, राजू तोडसाम, संजय देरकर और बालासाहेब मांगुलकर उपस्थित रहे। जिलाधिकारी विकास मीना, मुख्य कार्यकारी अधिकारी संतोष धोत्रे, प्रकल्प अधिकारी रेवय्या डोंगरे, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमोल गायकवाड, समाज कल्याण सहायक आयुक्त मंगल मुन, जिला नियोजन अधिकारी सुधाकर आडे सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।
बैठक में 5 फरवरी 2026 को हुई जिला नियोजन समिति की बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों से पूर्व में दिए गए निर्देशों पर की गई कार्रवाई, लंबित कार्यों और योजनाओं की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली गई।
पालकमंत्री राठोड ने कहा कि जिले के विकास से जुड़े कार्यों को निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जाना चाहिए। विभिन्न विभागों को उपलब्ध निधि का नियोजनबद्ध तरीके से उपयोग करने और कामों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी विकास मीना ने बैठक में बताया कि जिला वार्षिक योजना 2026-27 के तहत सामान्य योजना, अनुसूचित जाति उपयोजना और आदिवासी उपयोजना को मिलाकर जिले के लिए कुल 821 करोड़ रुपये की निधि मंजूर की गई है। इसमें से अब तक 492.60 करोड़ रुपये की निधि प्राप्त हो चुकी है।
जिला नियोजन समिति की बैठक में निधि के विभागवार उपयोग की भी समीक्षा की गई। पालकमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्राप्त निधि को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रखते हुए उसका समय पर उपयोग विकास कार्यों में किया जाए।
पालकमंत्री संजय राठोड ने जिले में चल रही विभिन्न योजनाओं का लाभ पात्र नागरिकों तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने मंजूर निधि का प्रभावी इस्तेमाल करने, अधूरे विकास कार्यों को गति देने और विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए। बैठक में जिले की प्राथमिक जरूरतों के अनुसार उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करने पर भी चर्चा हुई।