सरकारी आश्रम स्कूल (सौजन्य-नवभारत) 
यवतमाल

न स्कॉलरशिप, न यूनिफॉर्म...महाराष्ट्र में बच्चों के साथ अन्याय! सरकारी स्कूलों की खुली पोल

Maharashtra Government Negligence: पुसद के सरकारी आश्रम स्कूलों में 6 महीने बाद भी न यूनिफॉर्म मिली, न छात्रवृत्ति। 2,765 छात्र सरकारी मदद से वंचित, अभिभावकों में गहरा रोष।

प्रिया जैस

Maharashtra News: पुसद तहसील स्थित सरकारी आश्रम स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को पहला सत्र समाप्त होने के बाद भी अब तक स्कूल यूनिफॉर्म उपलब्ध नहीं कराया गया है। यही स्थिति छात्रवृत्ति वितरण की भी है। अभिभावकों द्वारा छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने के बावजूद अब तक एक भी छात्र को राशि प्राप्त नहीं हुई।

इससे गरीब वर्ग के छात्र सरकारी योजनाओं से वंचित रह रहे हैं और अभिभावकों में शासन के प्रति तीव्र नाराजगी पसर गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार तहसील क्षेत्र में कुल आठ सरकारी आश्रम शालाएं हैं, जिनमें 2,765 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इन छात्रों को गणवेश और छात्रवृत्ति की राशि नाशिक स्थित आयुक्तालय द्वारा प्रदान की जाती है, लेकिन आयुक्तालय स्तर पर चल रही लापरवाही के कारण दिवाली बीत जाने के बावजूद गणवेश का वितरण नहीं हो सका है।

मुख्याध्यापक कर रहे टालमटोल

साथ ही छात्रवृत्ति की रकम भी अब तक अभिभावकों के संयुक्त खाते में जमा नहीं हुई है। इस स्थिति को लेकर अभिभावक विद्यालयों के मुख्याध्यापकों और पीओ (प्रोजेक्ट ऑफिसर) से लगातार पूछताछ कर रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन और टालमटोल भरे जवाब मिल रहे हैं। अभिभावकों का आरोप है कि सरकारी स्कूलों के छात्रों के प्रति शासन का पूर्णत: उदासीन रवैया है। वर्तमान समय में अधिकांश अभिभावक उस तोडाई (गन्ना कटाई) के लिए बाहर गए हैं, ऐसे में वे सवाल उठा रहे हैं कि जब इतनी देरी हो रही है, तो क्या गर्मी की छुट्टियाँ आने के बाद ही सरकारी सहायता मिलेगी?

छात्रों को जल्द ही मिलेगा गणवेश और छात्रवृत्ति

एचएम और पीओ स्तर से लगातार फॉलो-अप किया जा रहा है। 15 से 20 दिसंबर तक छात्रवृत्ति की राशि अभिभावकों के संयुक्त खाते में जमा हो जाएगी। गणवेश का टेंडर कोर्ट केस में फंसने के कारण देरी हुई है। अगले पंद्रह दिनों में गणवेश वितरण हो जाएगा। यदि प्रक्रिया प्रोजेक्ट स्तर पर होती तो तुरंत वितरण हो जाता, पर पूरा काम नाशिक आयुक्तालय से होने के कारण विलंब लग रहा है।

- अरुण चव्हाण, PO, पुसद

शून्य नियोजन का काम जारी

हमारे बच्चों को अब तक न छात्रवृत्ति मिली है और न ही गणवेश। अधिकारियों को समय की कोई पाबंदी नहीं है। किचन में भी शासन द्वारा निर्धारित मेन्यू नहीं दिया जाता। बच्चों को केवल मटकी खिलाई जाती है, फल भी नहीं मिलते। अधिकारी सरकारी स्कूलों पर ध्यान दें और हमारे साथ हो रहे अन्याय की जांच कर तुरंत कार्रवाई करें।

- गजानन बुरकुले, अभिभावक, नानंद (खु.)

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