प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स-AI) 
महाराष्ट्र

यवतमाल के पांढरकवड़ा वन क्षेत्र में तेंदूपत्ता संकलन पर समिति और ठेकेदार में टकराव

Illegal Tendu Patta: यवतमाल के पांढरकवड़ा वन विभाग क्षेत्र में अवैध तेंदूपत्ता फड़ संचालन को लेकर विवाद गहरा गया है। अधिकृत लाइसेंसधारक ने आर्थिक नुकसान का आरोप लगाया और तत्काल कार्रवाई की मांग की।

अनन्या तिवारी

Illegal Tendu Patta Collection Dispute In Yavatmal Forests: यवतमाल के पांढरकवड़ा वन विभाग के अंतर्गत आने वाले तेंदू घटक क्रमांक 7 के ढोकी रोड, बोथ और वडनेर गांवों में अवैध रूप से तेंदू फड़ चलाकर वन विभाग के नियमों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। इस संबंध में अधिकृत लाइसेंस धारक द्वारा जिलाधिकारी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मुख्य वन संरक्षक, उपवन संरक्षक और गुट विकास अधिकारी को बार-बार लिखित शिकायतें देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

प्रशासन की ढीली कार्यप्रणाली से लाखों पत्तों के नुकसान का खतरा

प्रशासन की इस ढीली और विलंबपूर्ण कार्यप्रणाली के कारण संग्रहण केंद्रों पर रखी लाखों तेंदूपत्तियों के खराब होने का खतरा पैदा हो गया है, जिससे लाइसेंसधारक को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। तेंदू सीजन 2026 के लिए अफरोज ट्रेडिंग कंपनी की लाइसेंस धारक परवीन अब्दुल गिलानी ने ई-निविदा प्रक्रिया में विधिवत भाग लेकर शासन के नियमों के अनुसार सर्वाधिक बोली लगाई थी। इसके आधार पर मुख्य वन संरक्षक, प्रादेशिक यवतमाल वनवृत्त कार्यालय ने कंपनी को तेंदू घटक 7 पांढरकवडा पेसा विकल्प क्रमांक 1 के लिए अधिकृत लाइसेंसधारक के रूप में मंजूरी प्रदान की। कंपनी ने 29 अप्रैल को विधिवत करार पूरा कर 10 प्रतिशत EMD और 25 प्रतिशत बैंक गारंटी भी उपवन संरक्षक कार्यालय में जमा की।

अनुमति के बाद शुरू हुआ तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य

इसके बाद कंपनी को संबंधित गांवों में तेंदूपत्ता संग्रहण की अधिकृत अनुमति प्रदान की गई। अनुमति मिलने के बाद अफरोज ट्रेडिंग कंपनी ने ढोकी रोड, बोथ और वडनेर गांवों में तेंदू फड़ का संचालन शुरू किया। लेकिन प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी करते हुए स्थानीय सामूहिक वनाधिकार प्रबंधन समिति ने अपना अलग अवैध तेंदू फड़ शुरू कर दिया।

लाइसेंसधारक का आरोप भारी आर्थिक नुकसान

अफरोज ट्रेडिंग कंपनी के एक लाइसेंसधारक परवीन अब्दुल गिलानी का कहना है कि उन्होंने सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर और शासन को लाखों रुपये का राजस्व जमा कर यह लाइसेंस प्राप्त किया है। लेकिन इस अवैध तेंदू फड़ के कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। उनका मानना है कि प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप कर अवैध खरीदारों से जब्त किए गए तेंदू पुड़े अधिकृत लाइसेंसधारक के रूप में उन्हें सौंपना चाहिए और न्याय दिलाना चाहिए।

एसीएफ विशाल चव्हाण ने बताया कि इस संबंध में गुरुवार को जिला कलेक्टर कार्यालय में बैठक आयोजित की गई थी। दोनों पक्ष अपने-अपने प्रस्तावों को वैध बता रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने मुख्य कार्यकारी अधिकारी से प्राप्त प्रस्ताव के आधार पर वन विभाग ने ‘विकल्प 1’ की कानूनी प्रक्रिया पूरी की थी। उन्होंने कहा कि अब अंतिम समाधान के लिए संबंधित गांवों में जल्द ही विशेष ग्रामसभा आयोजित की जाएगी। उनका कहना है कि ग्रामसभा में जो निर्णय होगा, वही अंतिम माना जाएगा।

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