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कम बारिश के कारण वर्धा जिले के बड़े और मध्यम जलाशयों में जलभंडार घटा है, जबकि कई छोटे जलाशय सूख चुके हैं।
जिलाधिकारी वान्मश्री सी. के निर्देश पर जलसंकट से निपटने के लिए उपाययोजनाओं का प्रारूप तैयार किया जा रहा है।
आर्वी, आष्टी, कारंजा और समुद्रपुर के कुछ गांवों में जरूरत पड़ने पर टैंकर से जलापूर्ति करनी पड़ सकती है।
Wardha Reservoir Water Level: वर्धा जिले में अत्यल्प बारिश के कारण भविष्य में भीषण जलसंकट के आसार बने हुए हैं। जिले के बड़े व मध्यम जलाशयों में मात्र 68 प्रतिशत तक जलभंडार शेष है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने सभी तहसीलों में जलकिल्लत पर समीक्षा बैठक ली है। अवैध जल दोहन से लेकर पानी के उचित उपयोग तक सभी बातों की समीक्षा की गई। अब सभी 8 तहसीलों से प्राथमिक रिपोर्ट भेजी गई है। इसमें कुछ सुधार कर प्रथम चरण के कृति प्रारूप पर काम शुरू है।
जलसंकट की स्थिति से निपटने के लिए शीघ्र ही इसे मंजूरी दी जाएगी, ऐसा बताया गया। इस वर्ष औसत से भी कम बारिश दर्ज की गई। परिणामस्वरूप बड़े व मध्यम 11 जलाशयों तथा छोटे 21 जलाशयों में अत्यल्प जलभंडार है। कुछ छोटे जलाशय तो अभी से सूख चुके हैं। परिणामस्वरूप जिले में भविष्य में जलसंकट के साथ-साथ मवेशियों के लिए चारे की किल्लत का भी सामना करना पड़ सकता है। इस स्थिति से निपटने के लिए विभिन्न उपाययोजनाओं पर जोर देना शुरू कर दिया गया है।
जिलाधिकारी वान्मश्री सी. ने स्वयं सभी तहसीलों की बैठक में मौजूद रहकर स्थिति की समीक्षा की। उनके निर्देश पर जलसंकट से निपटने के लिए उपाययोजनाओं का कृति प्रारूप तैयार हो रहा है।सन 2025-26 में जिले के 1015 गांवों में जलसंकट से निपटने के लिए 1163 काम प्रस्तावित किए गए थे। इसमें नई बोरवेल का निर्माण, पुरानी बोरवेल की मरम्मत, नल जलापूर्ति योजना की विशेष दुरुस्ती, कुओं का गहरईकरण व अधिग्रहण तथा प्रगतिपथ पर होने वाली नल योजना की दुरुस्ती के काम शामिल थे।
इस वर्ष अल्प वर्षा के कारण स्थिति भयावह रूप ले सकती है। आर्वी, आष्टी, कारंजा और समुद्रपुर तहसीलों के कुछ गांवों में टैंकर से जलापूर्ति करने की नौबत आ सकती है। जलाशयों में अत्यल्प जल होने के कारण अभी से जलापूर्ति सेवा में कटौती की जाने वाली है। लोगों से पानी का उपयोग सोच-समझकर करने की अपील की जा रही है। नई बोरवेल के निर्माण पर अस्थायी पाबंदी है, भविष्य में स्थिति और भयावह रूप ले सकती है। कई कड़े प्रतिबंध लगने के आसार हैं।
वर्धा शहर को जलापूर्ति करने वाली धाम नदी में काफी कम पानी शेष है। भविष्य में स्थित्ति और गंभीर रूप ले सकती है। ऐसे में नप प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। आगामी दिनों में जलापूर्ति में भारी कटौती के संकेत हैं। नप कार्यक्षेत्र में आने वाले 37 सार्वजनिक कुओं को कब्जे में लेकर जलापूर्ति के लिए उपयोग में लाया जाएगा। समय आने पर निजी कुओं का भी अधिग्रहण होगा। परिस्थिति के अनुसार उपाययोजना कर कुछ ठोस कदम उठाए जाएंगे, ऐसा नगराध्यक्ष सुधीर पांगुल ने बताया।
जिप ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के धीरज पराडे ने कहा कि प्रथम चरण के कृति प्रारूप पर काम शुरू है। सभी तहसीलों में जलसवाट की स्थिति के संदर्भ में बैठक ली गई। पंचायत समिति स्तर से रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। इसमें कुछ सूचार कर शीघ्र ही कृति प्रारूप तैयार किया जाएगा, भविष्य में गर्मी के दिनों में पैदा होने वाले जलसवाट को ध्यान में रखते हुए उपाययोजनाओं के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे है।