

Municipal Water Tanker Service Affected: छत्रपति संभाजीनगर शहर में भीषण गर्मी के बीच बढ़ती पानी की मांग के कारण अब मनपा की टैंकर सेवा डीजल संकट से प्रभावित होने लगी है। पेट्रोल पंपों पर सीमित डीजल उपलब्ध होने से टैंकर चालकों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है। इसके चलते नो-नेटवर्क एवं जल संकटग्रस्त क्षेत्रों में पानी सप्लाई देर से हो रही है, जिससे नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है।
महानगरपालिका की ओर से छत्रपति संभाजीनगर शहर के नो-नेटवर्क क्षेत्रों व पानी की कमी वाले इलाकों में टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाया जाता है। इसके लिए दो निजी ठेकेदार एजेंसियां नियुक्त की गई हैं। गर्मियों में पानी की मांग में भारी इजाफा हुआ है व रोजाना 84 टैंकरों के माध्यम से लगभग 250 से 300 फेरे लगाए जा रहे हैं। हालांकि डीजल की कमी के कारण यह व्यवस्था प्रभावित हो रही है। मनपा के एन-5, एन-7, समता नगर व नक्षत्रवाड़ी केंद्रों से टैंकरों में पानी भरकर भेजा जाता है।
शहर के 26 नो-नेटवर्क क्षेत्रों में नियमित पाइपलाइन व्यवस्था नहीं होने से नागरिक पूरी तरह टैंकरों पर निर्भर हैं। मनपा की ओर से एक दिन छोड़कर पानी आपूर्ति की जाती है, लेकिन टैंकर खराब होना, चालक अनुपस्थित रहना, डीजल की कमी व पानी भरने में देरी जैसी समस्याओं के कारण सप्लाई बाधित हो रही है। शहर के कई पेट्रोल पंपों पर डीजल खत्म होने के कारण 'नो स्टॉक' के बोर्ड लगाए गए हैं। पेट्रोल भरवाने के लिए भी लंबी कतारें लग रही हैं व सीमित मात्रा में ईंधन दिया जा रहा है। डीजल से चलने वाले कई चारपहिया वाहन घरों के बाहर खड़े रहने को मजबूर हैं।
सभी टैंकरों के लिए प्रतिदिन करीब चार हजार लीटर डीजल की आवश्यकता होती है। ठेकेदार एजेंसियों के अनुसार कई पेट्रोल पंपों पर एक वाहन को केवल तीन हजार रुपये तक का ही डीजल दिया जा रहा है। इससे टैंकर चालकों को बार-बार पंपों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं व पानी वितरण में देरी हो रही है। शहर के कई इलाकों में पहले से ही आठ से दस दिनों में एक बार पानी मिल रहा है। ऐसे में नागरिकों को निजी टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
बढ़ती मांग का फायदा उठाकर निजी टैंकर संचालकों ने पानी के दाम बढ़ा दिए हैं। कई नागरिकों ने शिकायत की है कि बुकिंग के बाद भी दो से चार दिन इंतजार करना पड़ रहा है। जलसंकट व बढ़ती मांग के चलते निजी टैंकर व्यवसाय तेजी से बढ़ रहा है। कई इलाकों में कुएं, बोरवेल व हैंडपंप सूख चुके हैं। ऐसे में लोगों को ऊंचे दामों पर पानी खरीदना पड़ रहा है। अधिकांश निजी टैंकर बिना फिटनेस सर्टिफिकेट और प्रशिक्षित ड्राइवरों के चल रहे हैं।