अंग्रेजों के उड़े होश जब नेताजी ने बनाई अपनी सरकार, जानिए 1943 का वो प्लान, जिसने बदला देश का इतिहास

Azad Hind Government: नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भारत की स्वतंत्रता के लिए सशस्त्र संघर्ष की राह चुनते हुए 1943 में आजाद हिंद सरकार की स्थापना की थी। जानिए इसकी पूरी रणनीति और ऐतिहासिक महत्व।
Azad Hind Army Founder Day
रानी झांसी रेजिमेंट के साथ सुभाष चंद्र बोस(सोर्स- सोशल मीडिया)
Published on: 
Updated on: 

Highlights:

  • नेताजी ने 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में आजाद हिंद सरकार बनाई

  • आजाद हिंद फौज ने जापानी सेना के साथ भारत में सैन्य अभियान चलाया

  • रानी झांसी रेजिमेंट ने स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई

Azad Hind Army Founder Day: भारत की आजादी की लड़ाई में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने अंग्रेजों से भारत को मुक्त कराने के लिए सशस्त्र संघर्ष का रास्ता चुना। उनका मानना था कि ब्रिटिश शासन को केवल राजनीतिक आंदोलनों से चुनौती देना पर्याप्त नहीं है बल्कि इसके लिए सैन्य शक्ति और अंतरराष्ट्रीय समर्थन भी जरूरी है। इसी रणनीति के तहत 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में आजाद हिंद सरकार की स्थापना की गई। यह स्वतंत्र भारत की पहली अस्थायी सरकार थी जिसका उद्देश्य अंग्रेजों को भारत से बाहर निकालना था।

आजाद हिंद सरकार बनाने की जरूरत क्यों पड़ी

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन सहित कई यूरोपीय देश सैन्य संघर्ष में उलझे हुए थे। नेताजी ने इस परिस्थिति को भारत की स्वतंत्रता के लिए एक अवसर के रूप में देखा। उनका मानना था कि जब ब्रिटिश साम्राज्य युद्ध में कमजोर हो रहा है तब भारतीयों को संगठित होकर निर्णायक संघर्ष करना चाहिए। इसी उद्देश्य से उन्होंने विदेशों में रह रहे भारतीयों को एकजुट करने और भारत की आजादी के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की योजना बनाई।

21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में आजाद हिंद सरकार की घोषणा की गई। नेताजी ने सरकार के प्रमुख के रूप में राष्ट्राध्यक्ष प्रधानमंत्री और युद्ध मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। इस सरकार का उद्देश्य स्वतंत्र भारत की राजनीतिक पहचान स्थापित करना और आजाद हिंद फौज के माध्यम से ब्रिटिश शासन के खिलाफ सैन्य अभियान चलाना था।

indian national army
INA के सैन्य कमांडरों के साथ नेताजी सुभाष चंद्र बोस(सोर्स- सोशल मीडिया)
Azad Hind Army Founder Day
नवभारत विशेष: UNSC में स्थायी सीट की मांग तेज, भारत ने उठाए संयुक्त राष्ट्र में सुधार के सवाल

क्या थी नेताजी की पूरी रणनीति

नेताजी की रणनीति के तीन प्रमुख हिस्से थे। पहला था स्वतंत्र भारत की सरकार स्थापित करके दुनिया को यह संदेश देना कि भारतीय अपना शासन स्वयं चलाने में सक्षम हैं। दूसरा था आजाद हिंद फौज को मजबूत करके ब्रिटिश सेना के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष करना। तीसरा था विदेशी सरकारों और प्रवासी भारतीयों से आर्थिक सैन्य और राजनीतिक सहयोग प्राप्त करना।

आजाद हिंद फौज का गठन 1942 में हुआ था लेकिन 1943 में नेताजी के नेतृत्व में इसे नई दिशा मिली। दक्षिण पूर्व एशिया में मौजूद भारतीय सैनिकों और प्रवासी भारतीयों को इस सेना से जोड़ा गया। बड़ी संख्या में भारतीयों ने धन और संसाधन देकर स्वतंत्रता आंदोलन का समर्थन किया। नेताजी ने महिलाओं की भागीदारी को भी महत्व दिया और रानी झांसी रेजिमेंट का गठन किया। यह महिलाओं की सैन्य भागीदारी का एक महत्वपूर्ण उदाहरण था।

नेताजी का प्रसिद्ध नारा दिल्ली चलो आजाद हिंद फौज के सैनिकों के लिए प्रेरणा बना। उनकी योजना जापानी सेना के सहयोग से बर्मा के रास्ते भारत में प्रवेश करने और ब्रिटिश शासन को सैन्य चुनौती देने की थी।

indian national army
आजाद हिंद फौज(सोर्स- सोशल मीडिया)

जापान से सहयोग और सैन्य अभियान

आजाद हिंद सरकार को जापान सहित धुरी राष्ट्रों से जुड़े कई देशों ने मान्यता दी। जापान ने अंडमान और निकोबार द्वीपों का प्रशासनिक नियंत्रण आजाद हिंद सरकार को सौंपा। नेताजी ने इन द्वीपों का नाम शहीद और स्वराज रखा। हालांकि जापान पर निर्भरता आजाद हिंद सरकार की एक बड़ी सीमा भी थी क्योंकि उसके पास स्वतंत्र रूप से बड़े सैन्य अभियान चलाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं थे।

1944 में आजाद हिंद फौज ने जापानी सेना के साथ मिलकर भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में अभियान चलाया। मणिपुर के मोइरांग में आजाद हिंद फौज की उपस्थिति इस अभियान का महत्वपूर्ण पड़ाव बनी। लेकिन इम्फाल और कोहिमा के मोर्चों पर भारी बारिश खराब आपूर्ति और मित्र राष्ट्रों की सैन्य बढ़त के कारण अभियान सफल नहीं हो सका।

आजाद हिंद सरकार का ऐतिहासिक महत्व

1945 में जापान की हार के साथ आजाद हिंद सरकार की सैन्य रणनीति भी कमजोर पड़ गई। इसके बावजूद आजाद हिंद फौज के सैनिकों पर चले मुकदमों ने भारत में व्यापक जनसमर्थन और ब्रिटिश शासन के खिलाफ असंतोष को बढ़ाया।

Azad Hind Army Founder Day
नवभारत विशेष: रोबोट करेंगे जंग का सबसे खतरनाक काम! यूक्रेन ने अपनाई नई युद्ध तकनीक

आजाद हिंद सरकार भारत को तत्काल स्वतंत्र नहीं करा सकी लेकिन उसने स्वतंत्रता आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने यह साबित करने का प्रयास किया कि स्वतंत्रता के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति सैन्य संगठन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को एक साथ लाना जरूरी है। यही वजह है कि आजाद हिंद सरकार भारतीय इतिहास में साहस संघर्ष और स्वतंत्रता के संकल्प का प्रतीक बनी हुई है। 

Navbharat Live
navbharatlive.com