वर्धा जिले तुअर दाल (फोटो-सोर्स,सोशल मीडिया)  
वर्धा

वर्धा: तुअर उत्पादक किसानों को झटका; नाफेड केंद्रों की सुस्त रफ्तार और निजी व्यापारियों की मनमानी से नुकसान

Wardha Tur Crop News: वर्धा जिले में नाफेड की धीमी तुअर खरीदी और केवल एक केंद्र चालू होने से किसान परेशान हैं। निजी व्यापारी समर्थन मूल्य से कम दाम पर खरीद कर किसानों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं।

रूपम सिंह

Wardha Agriculture News: वर्धा जिले में खरीफ सीजन की प्रमुख फसल तुअर को लेकर किसानों की उम्मीदों को झटका लगा है। जहां किसानों को अच्छे दाम मिलने की आशा थी, वहीं हकीकत में निजी व्यापारी समर्थन मूल्य से कम दर पर खरीद कर उनका नुकसान कर रहे हैं। किसानों को उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से नाफेड के माध्यम से खरीदी केंद्र शुरू किए गए हैं, लेकिन व्यवस्था सीमित और धीमी होने से किसानों में असंतोष बढ़ रहा है। 22 मार्च तक जिले में केवल 196 किसानों ने तुअर बिक्री के लिए पंजीयन कराया है।

नाफेड द्वारा फिलहाल सिर्फ वर्धा में एक ही केंद्र पर खरीदी की जा रही है। इस केंद्र पर अब तक 116 किसानों से 844.80 क्विंटल तुअर की खरीद की गई है। खरीफ सीजन में अतिवृष्टि के कारण फसलों को भारी नुकसान हुआ था। सोयाबीन और कपास की पैदावार भी रोगों के कारण प्रभावित रही। ऐसे में किसानों की उम्मीद तुअर पर टिकी थी। हालांकि परती के बारिश ने इस फसल को भी प्रभावित किया, फिर भी किसानों को कुछ हद तक उत्पादन मिला। बेहतर दाम की उम्मीद में कई किसानों ने तुअर को घर में ही संग्रहित कर रखा था।

शुरुआत में बाजार में आवक कम होने से कीमतों में तेजी दिखी, लेकिन जैसे ही नई फसल बाजार में आई, कीमतें गिरने लगीं। वर्तमान में व्यापारी समर्थन मूल्य से कम दर पर तुअर खरीद रहे हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरकार द्वारा नाफेड और महाराष्ट्र राज्य कृषि विपणन मंडल के माध्यम से समर्थन मूल्य पर खरीद की योजना लागू की गई थी। इसके लिए 20 जनवरी से 20 फरवरी 2026 तक पंजीकरण अनिवार्य किया गया था।

हालांकि नाफेड की जटिल शर्तों के कारण कई किसान पंजीकरण नहीं करा सके। वर्धा जिले में आष्टी, देवली, कारंजा और वर्धा सहित चार नाफेड केंद्र निर्धारित किए गए हैं, लेकिन वर्तमान में केवल वर्धा केंद्र ही शुरू है। अन्य तालुका स्तर के केंद्र अब तक चालू नहीं किए गए हैं, जिससे किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या की ओर ध्यान देने की मांग की जा रही है।

116 किसानों ने बेची उपज

वर्धा केंद्र पर पंजीकृत 120 किसानों में से 116 किसानों की 844।80 क्विंटल तुअर खरीदी जा चुकी है। इनमें से 632.07 क्विंटल की राशि 50 लाख 56 हजार 568 रुपये किसानों के खातों में जमा कर दी गई है, जबकि 212.73 क्विंटल के लगभग 17 लाख 1 हजार 832 रुपये अभी तक किसानों को प्राप्त नहीं हुए हैं। इससे किसानों को भुगतान का इंतजार करना पड़ रहा है। नाफेड की धीमी खरीदी प्रक्रिया और सीमित केंद्रों के कारण किसानों में नाराजगी बढ़ रही है। किसानों ने मांग की है कि तालुका स्तर पर सभी केंद्रों को तत्काल शुरू किया जाए, ताकि उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिल सके।

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