Wardha Human Tiger Leopard Deaths: वर्धा के जंगलों से सामने आए आंकड़े मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष की तस्वीर दिखाते हैं।
पिछले साढ़े पांच वर्षों में जिले में विभिन्न कारणों से 7 बाघ और 33 तेंदुओं की मौत हुई है। वहीं, ढाई वर्षों में वन्यजीवों के हमलों में 8 लोगों की जान गई और 217 लोग घायल हुए हैं।
वर्धा जिले में मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले साढ़े पांच वर्षों में जिले में 7 बाघ और 33 तेंदुओं, यानी कुल 40 हिंसक वन्यजीवों की मौत दर्ज की गई है।
विभाग के अनुसार, इन मौतों के पीछे अलग-अलग कारण सामने आए हैं। दो मामलों में वन्यजीवों के शिकार की पुष्टि हुई है, जबकि अन्य मामलों में करंट लगने, बीमारी और प्राकृतिक कारणों से मौत होने की जानकारी दी गई है।
जिले के प्रादेशिक वन क्षेत्र में कुल आठ वनपरिक्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा यहां बोर व्याघ्र प्रकल्प भी मौजूद है, जिसका क्षेत्र कुछ समय पहले बढ़ाया गया है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष का दूसरा पहलू इंसानों की सुरक्षा से जुड़ा है। वन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रादेशिक वन क्षेत्र में पिछले ढाई वर्षों के दौरान हिंसक वन्यजीवों के हमलों में 8 लोगों की मौत और 217 लोग घायल हुए हैं।
हाल के दिनों में भी बाघों के हमले की कई घटनाएं सामने आई हैं। हिंगनी वनपरिक्षेत्र के रायपुर जंगली में बाघ के हमले में किसान भगवान धुर्वे की मौत के बाद गांव में करीब छह दिनों तक तनाव की स्थिति बनी रही थी। इससे पहले आष्टी तहसील के नरसिंगपुर में भी बाघ के हमले में एक किसान की मौत हुई थी।
समुद्रपुर वनपरिक्षेत्र के पवनगांव में बाघ के हमले में एक युवक गंभीर रूप से घायल हुआ था।
वन विभाग के अनुसार, वर्तमान में प्रादेशिक वन क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में 20 से अधिक वयस्क बाघ विचरण कर रहे हैं। इसके साथ ही जंगल से सटे गांवों में तेंदुओं की आवाजाही बढ़ने से ग्रामीणों में भी चिंता और दहशत का माहौल बताया जा रहा है।217 लोग घायल, 8 की मौत
मानव-वन्यजीव संघर्ष का दूसरा पहलू इंसानों की सुरक्षा से जुड़ा है। वन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रादेशिक वन क्षेत्र में पिछले ढाई वर्षों के दौरान हिंसक वन्यजीवों के हमलों में 8 लोगों की मौत और 217 लोग घायल हुए हैं।
हाल के दिनों में भी बाघों के हमले की कई घटनाएं सामने आई हैं। हिंगनी वनपरिक्षेत्र के रायपुर जंगली में बाघ के हमले में किसान भगवान धुर्वे की मौत के बाद गांव में करीब छह दिनों तक तनाव की स्थिति बनी रही थी। इससे पहले आष्टी तहसील के नरसिंगपुर में भी बाघ के हमले में एक किसान की मौत हुई थी।
समुद्रपुर वनपरिक्षेत्र के पवनगांव में बाघ के हमले में एक युवक गंभीर रूप से घायल हुआ था।
मानव-वन्यजीव संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग की ओर से विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं। बाघों के मुक्त विचरण वाले क्षेत्रों में ट्रैप और सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी रखी जा रही है। ऐसे इलाकों में वन विभाग ने पेट्रोलिंग भी बढ़ाई है।
जंगल से सटे गांवों में ग्रामीणों को वन्यजीवों से बचाव और सावधानी के संबंध में जनजागरण अभियान चलाने की जानकारी दी गई है। वन विभाग के सामने लोगों की सुरक्षा के साथ वन्यजीवों के संरक्षण और शिकार पर रोक लगाने की दोहरी चुनौती बनी हुई है।