रोहित पवार किसान आंदोलन (सोर्स: सोशल मीडिया)
वर्धा

6 दिनों से क्यों नहीं हुआ था मृत किसान का अंतिम संस्कार? रोहित पवार ने सरकार पर उठाए सवाल

Wardha Tiger Attack : वर्धा के रायपुर जंगली में बाघ के हमले में किसान भगवान धुर्वे की मौत के बाद धरना हुआ। रोहित पवार ने सरकार पर सवाल उठाए, प्रशासन से बातचीत के बाद आंदोलन वापस लिया गया।

मनीषा बोंदरे

Wardha Rohit Pawar Protest : वर्धा के रायपुर (जंगली) गांव में बाघ के हमले में किसान भगवान धुर्वे की मौत के बाद मंगलवार को जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरना हुआ। सांसद अमर काले के नेतृत्व में हुए आंदोलन में विधायक रोहित पवार ने सरकार पर निशाना साधा।

प्रशासन और परिजनों के बीच बातचीत के बाद आंदोलन वापस लेने का निर्णय हुआ। आंदोलन में पहुंचे विधायक रोहित पवार ने सत्ताधारियों पर ग्रामीणों और मृतक परिवार की मांगों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाने का आरोप लगाया।

यह संघर्ष सिर्फ एक परिवार का नहीं- रोहित पवार

बोर व्याघ्र परियोजना से सटे रायपुर जंगली गांव में बाघ के हमले में किसान भगवान धुर्वे की मौत के मामले को लेकर मंगलवार को जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरना आंदोलन किया गया। सांसद अमर काले के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन में विधायक रोहित पवार भी शामिल हुए।

ग्रामीणों से संवाद करते हुए रोहित पवार ने कहा कि घटना को छह दिन बीत चुके हैं, लेकिन मृत किसान के परिवार और ग्रामीणों की मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि सांसद अमर काले के नेतृत्व में चल रहा संघर्ष केवल एक परिवार का मुद्दा नहीं है। पवार ने इसे राज्य की सत्ता के खिलाफ संघर्ष बताते हुए सरकार पर तंज कसा।

उन्होंने रायपुर (जंगली) गांव के पुनर्वास का मुद्दा भी उठाया। पवार के अनुसार, गांव के पुनर्वास का प्रस्ताव वर्ष 2016 में तैयार किया गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने वर्षों बाद भी इस संवेदनशील विषय पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

आंदोलनकारियों को नोटिस देने का आरोप

रोहित पवार ने आरोप लगाया कि जिलाधिकारी कार्यालय के सामने चल रहे आंदोलन में ग्रामीण शामिल न हों, इसके लिए उन्हें नोटिस दिए गए। उन्होंने दावा किया कि पुलिस को रात में गांव तक जाना पड़ा। पवार ने कहा कि यदि जिले में पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध है तो उसे जंगलों में तैनात किया जाना चाहिए, ताकि वन्यजीवों के हमलों को रोकने के लिए प्रभावी उपाय किए जा सकें।

उन्होंने पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर पर भी निशाना साधते हुए गंभीर घटना के बावजूद कार्यक्रमों में व्यस्त रहने का आरोप लगाया।

प्रशासन से बातचीत के बाद आंदोलन वापस

आंदोलन के दौरान प्रशासन और मृतक के परिजनों के बीच हुई बातचीत में कई मांगों पर सहमति बनने के बाद शिष्टमंडल और परिवार ने आंदोलन वापस लेने का निर्णय लिया। अब 16 सितंबर को सुबह 11 बजे रायपुर में भगवान धुर्वे का अंतिम संस्कार किया जाएगा।

प्रशासन की ओर से ₹25 लाख की सहायता स्वीकार किए जाने के बाद आदिवासी विभाग से ₹10 लाख और वन विभाग से ₹10 लाख की अतिरिक्त सहायता दिलाने का आश्वासन दिया गया है।

पालकमंत्री बोले- मामले में राजनीति नहीं करनी चाहिए

पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर ने कहा कि शासन निर्णय के अनुसार भगवान धुर्वे के परिजनों को ₹25 लाख की आर्थिक सहायता दी जाएगी। अन्य मांगों को भी शासन के समक्ष भेजा गया है। उन्होंने कहा कि मृतक के अंतिम संस्कार को मांगों के लिए रोके रखना उचित नहीं है और मामले में राजनीति नहीं की जानी चाहिए।

सांसद अमर काले ने कहा कि आगे के आंदोलन की दिशा ग्रामीणों और मृतक के परिजनों से चर्चा के बाद तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि मांगों पर विचार होने तक संघर्ष जारी रहेगा।

आंदोलन में पूर्व मंत्री रणजीत कांबले, अतुल बादिले, सलील देशमुख, सुधीर पांगुल, किरण ठाकरे, डॉ. अभ्युदय मेघे समेत कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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