

Karanja Drought Demand: खरीफ सीजन में बारिश के लंबे सूखे के कारण फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे पैदावार की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं, सिर पर चढ़े कर्ज के बोझ और सरकार से किसी तरह की ठोस राहत न मिलने से आक्रोशित कारंजा तहसील के किसान सड़कों पर उतर आए।
पूर्ण कर्ज माफी, कारंजा तहसील को सूखाग्रस्त घोषित करने, फसल नुकसान के मुआवजे और फसल बीमा की राशि तुरंत जारी करने जैसी मांगों को लेकर विधायक रोहित पवार के नेतृत्व में 'किसान आक्रोश' मोर्चे का आयोजन किया गया था, यह मोर्चा मंगलवार दोपहर 12 बजे दिवंगत विधायक राजेंद्र पाटणी के जनसंपर्क कार्यालय से शुरू होकर बायपास, जानता राजा चौक और जयस्तंभ चौक होते हुए तहसील कार्यालय पहुंचा।
तहसील कार्यालय पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए विधायक रोहित पवार ने सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा, उन्होंने कहा, जब किसान इतने बड़े संकट से गुजर रहा है, तब सरकार चुप क्यों बैठी है।
इसके साथ ही अन्य नेताओं ने भी सरकार की किसान विरोधी नीतियों की कड़ी आलोचना की, इस वर्ष खरीफ सीजन में बारिश की लंबी खींचतान से सोयाबीन, मूंग और उड़द जैसी फसलें पूरी तरह प्रभावित हुई हैं, एक तरफ फसल की बर्बादी, दूसरी तरफ कर्ज का दबाव और तीसरी तरफ सरकारी मदद का इंतजार।
इन परिस्थितियों ने किसानों को बेहद लाचार बना दिया है। प्रदर्शन के अंत में एक प्रतिनिधिमंडल ने तहसीलदार को किसानों की मांगों का ज्ञापन सौंपा। इस मोर्चे में विधायक रोहित पवार के साथ ज्ञायक पाटणी, श्रीधर पाटिल उपस्थित थे।
मोर्चे की प्रमुख मांगों में किसानो की पूर्ण कर्ज माफी, सूखा घोषित करने, जिन किसानों ने फसल बीमा का प्रीमियम भरा है, उन्हें नुकसान का मुआवजा तुरंत उनके बैंक खातों में ट्रांसफर करने, जंगली जानवरों का बंदोबस्त करने, बिजली व्यवस्था में सुधार करने, महा-डीबीटी और बकाया भुगतान करने, साथ ही रोजगार गारंटी योजना के तहत किए गए कार्यों का बकाया भुगतान तुरंत करने की मांग का समावेश था।