Wardha Zilla Parishad Schools: ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यार्थियों की संख्या बनाए रखने के लिए शिक्षा विभाग विभिन्न योजनाएं और अभियान चला रहा है, लेकिन शिक्षकों के रिक्त पदों के कारण जिले की शैक्षणिक व्यवस्था गंभीर चुनौती का सामना कर रही है। शिक्षा विभाग के अनुसार वर्धा जिले में वर्तमान में 198 स्कूल ऐसे हैं, जहां केवल एक ही शिक्षक के भरोसे शिक्षण कार्य संचालित हो रहा है। इन स्कूलों में कुल 3,841 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिससे उनकी पढ़ाई और शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
इन 198 एकल शिक्षक विद्यालयों में सबसे अधिक 172 स्कूल जिला परिषद के हैं, जिनमें 2,909 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। जिले में जिला परिषद के कुल 905 स्कूल हैं, यानी लगभग हर पांच में से एक स्कूल केवल एक शिक्षक के सहारे चल रहा है। इन शिक्षकों को पहली से पांचवीं या उससे अधिक कक्षाओं के विद्यार्थियों को पढ़ाने के साथ-साथ विद्यालय प्रशासन, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, विद्यार्थियों का रिकॉर्ड, मध्यान्ह भोजन से जुड़े कार्य और अभिभावकों से समन्वय जैसी कई जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवेशोत्सव, जनजागरूकता अभियान और गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, लेकिन लंबे समय से रिक्त पड़े शिक्षक पद नहीं भरे जाने के कारण इन प्रयासों का अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहा है। वहीं, अभिभावकों ने भी एकल शिक्षक स्कूलों को लेकर चिंता जताई है।
उनका कहना है कि एक शिक्षक सभी विद्यार्थियों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाता, जिससे शिक्षा का स्तर प्रभावित हो रहा है। ग्रामीण विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने और शिक्षा की मजबूत नींव तैयार करने के लिए शिक्षकों के रिक्त पदों को शीघ्र भरने की मांग तेज हो गई है।