Wardha Monsoon Delay: मानसून की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन मौसम की अनिश्चितता के कारण वर्धा जिले में अब तक बुवाई योग्य बारिश नहीं हो सकी है। स्थिति यह है कि जहां एक ओर किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भूजल और जलाशयों का जलस्तर लगातार घटता जा रहा है। जून माह के पहले पखवाड़े में जिले में 70.05 मिमी वर्षा की कमी दर्ज की गई है, जिससे किसानों और नागरिकों की चिंता बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार, जून माह में जिले में औसतन 171.01 मिमी वर्षा होती है। इसके आधार पर माह के पहले 15 दिनों में लगभग 87.01 मिमी बारिश अपेक्षित थी, लेकिन वास्तविकता में इस अवधि में केवल 16.06 मिमी वर्षा ही दर्ज की गई। इस प्रकार जिले में 70.05 मिमी बारिश की कमी सामने आई है। मृग नक्षत्र की शुरुआत 8 जून से हुई थी और प्रारंभिक अनुमान में इस दौरान अच्छी वर्षा की संभावना जताई गई थी। हालांकि, मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि एल नीनो के प्रभाव के कारण इस वर्ष मानसूनी बारिश में देरी हो रही है। अब किसानों और नागरिकों की उम्मीदें 22 जून से शुरू होने वाले आद्रा नक्षत्र पर टिकी हुई हैं।
पिछले वर्ष भी जून माह में वर्षा सामान्य से कम रही थी, लेकिन तब भी 123.04 मिमी बारिश दर्ज की गई थी, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिली थी। इस वर्ष अब तक पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण खेतों में बुआई कार्य प्रभावित हुआ है। आसमान में बादलों की आवाजाही तो दिखाई दे रही है, लेकिन बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है। बारिश की कमी का असर जलस्रोतों पर भी दिखाई देने लगा है। जिले के विभिन्न जलाशयों और भूजल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। यदि आगामी दिनों में अच्छी वर्षा नहीं होती है तो जिले में जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती ।
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मृग नक्षत्र के दौरान आगे बारिश होने की उम्मीद में सिंचाई सुविधा वाले क्षेत्रों के कुछ किसानों ने कपास की धूल बुआई कर दी थी। जिले में लगभग 650 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की धूल बुआई की गई है। लेकिन पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण किसानों को अब दोबारा बुवाई करने की आशंका सताने लगी है। यदि जल्द ही अच्छी बारिश नहीं हुई तो किसानों को अतिरिक्त आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।