प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया) 
वर्धा

वर्धा: मानसून में बढ़ा पशुओं में संक्रामक बीमारियों का खतरा, समय पर टीकाकरण की अपील

Cattle Vaccination During Monsoon: वर्धा में मानसूनी बीमारियों के खतरे को देखते हुए विशेषज्ञों ने पशुपालकों से समय पर सरकारी अस्पतालों में टीकाकरण कराने की अपील की है।

केतकी मोडक

Monsoon Livestock Disease Prevention In Wardha: आगामी मानसून के मौसम के दौरान प्रकृति और मौसम में होने वाले अप्रत्याशित बदलाव का सीधा और बेहद प्रतिकूल असर अब पालतू पशुओं के स्वास्थ्य पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के इस सीजन में गौवंशीय पशुओं में गलघोटू और ब्लैक क्वार्टर तथा भेड़-बकरियों में एंटरोटॉक्सिमिया जैसी अत्यधिक गंभीर और संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।

ऐसी स्थिति में पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान से बचने के लिए अपने मवेशियों का समय रहते सुरक्षात्मक टीकाकरण कराने की सख्त सलाह दी गई है।

दुधारू भैंसों के लिए बेहद घातक है गलघोटू

पशु चिकित्सा विशेषज्ञों ने इन बीमारियों के गंभीर लक्षणों के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि 'गलघोटू' मुख्य रूप से दुधारू पशुओं, विशेषकर भैंसों में तेजी से फैलने वाला एक खतरनाक संक्रामक रोग है। इस बीमारी की चपेट में आते ही पशु को अत्यधिक तेज बुखार आता है, उसके गले में बड़ी सूजन हो जाती है, सांस लेने में भारी परेशानी होती है, आंखें पूरी तरह लाल हो जाती हैं और नाक-मुंह से लगातार लार या स्राव बहने लगता है।

यदि सही समय पर मवेशी को उचित उपचार न मिले, तो बहुत ही कम समय में पशु की मृत्यु भी हो सकती है। दूसरी ओर, 'एकटांग्या' नामक बीमारी मुख्य रूप से एक से दो वर्ष की कम आयु वाले युवा और दुधारू पशुओं को अपनी चपेट में लेती है।

इस रोग के कारण पशुओं के शरीर के भारी व मांसल भागों में बहुत तेज सूजन आ जाती है, जिसके चलते प्रभावित हिस्सा अंदर से सड़कर काला पड़ने लगता है और अंततः तड़प-तड़प कर पशु की मौत हो सकती है। यह बीमारी प्रायः उन पशुओं में अधिक देखी जाती है जो मानसून के दिनों में दलदली, अत्यधिक नमी और जलजमाव वाले क्षेत्रों में चरने के लिए जाते हैं।

मेमनों और बकरियों के लिए साइलेंट किलर है आंत्रविषार रोग

गाय-भैंसों के अलावा छोटे पालतू पशुओं में भी बारिश के दिनों में मौत का खतरा बढ़ जाता है। 'आंत्रविषार' नामक रोग विशेष रूप से बकरी और भेड़ों के स्वास्थ्य को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। दूषित चारा खाने और प्रदूषित पानी पीने के माध्यम से फैलने वाली यह घातक बीमारी पशुओं की आंतों में एक खतरनाक जहर पैदा करती है, जो कुछ ही घंटों में उनके पूरे शरीर के खून में फैल जाता है। इस बीमारी के संक्रमण के कारण भेड़-बकरियां अचानक अत्यधिक सुस्त हो जाती हैं, उन्हें तेज दस्त लग जाते हैं और कई गंभीर मामलों में तो मवेशियों को सीधे रक्तमिश्रित दस्त भी होने लगते हैं। चार से छह सप्ताह की बेहद कम आयु के छोटे मेमनों और बकरी के बच्चों में इस जानलेवा बीमारी का खतरा सबसे ज्यादा बना रहता है, जिससे पूरी की पूरी नस्ल एक साथ साफ हो सकती है।

शासकीय पशु चिकित्सालयों में संपर्क करें

पशुओं में फैलने वाले इस मानसूनी संकट को देखते हुए महाराष्ट्र राजपत्रित पशुचिकित्सा संघ के जिला अध्यक्ष डॉ. बी. वी. वंजारी ने वर्धा जिले के सभी छोटे-बड़े पशुपालकों और किसानों से एक महत्वपूर्ण अपील की है।

उन्होंने कहा है कि बीमारी के लक्षण दिखने का इंतजार किए बिना, पशुपालक तुरंत अपने सभी पशुओं को नजदीकी शासकीय पशु चिकित्सालय में लेकर जाएं और उनका समय पर पूरी तरह से टीकाकरण सुनिश्चित कराएं। मानसून से ठीक पहले लिया गया यह प्रतिबंधात्मक फैसला पशुओं को इन संभावित जानलेवा बीमारियों से पूरी तरह सुरक्षा प्रदान करेगा और किसानों को बड़े आर्थिक नुकसान से बचाएगा।

PM मोदी ने की पुणे मेट्रो की पिंक लाइन की तारीफ, जानें रूट, लागत और इसकी 3 बड़ी खूबियां

Explainer: न अनाथालय, न वृद्धाश्रम... नीता अंबानी का 100 एकड़ में बनेगा अनंत आश्रय, जानें क्या है खास?

ग्रामीण रोजगार योजना: शिकायतों के निपटारे की समयसीमा तय, 15 दिन में करना होगा समाधान

BJP की पद यात्रा में बरसे अमित शाह, बोले तेलंगाना से कांग्रेस को उखाड़ फेंकना है

Cyclone का नाम कैसे पड़ता है, जानें मुरासु का नाम किस देश ने रखा और क्यों ?