Wardha Animals Heatwave Relief ( Source: Social Media ) 
वर्धा

वर्धा में भीषण गर्मी, तेंदुआ, भालू सहित वन्यजीवों को गर्मी से राहत देने की पहल; करुणाश्रम में लगाए गए कूलर

Wardha Karunashram Wildlife Shelter: वर्धा में भीषण गर्मी के बीच करुणाश्रम में वन्यजीवों को राहत देने के लिए कूलर लगाए गए हैं। यहां तेंदुआ, भालू सहित घायल और लावारिस वन्यजीवों की देखभाल की जा रही है।

अंकिता पटेल

Wardha Animals Heatwave Relief: वर्धा दिन-ब-दिन तपन बढ़ते जा रही है। जिले का तापमान 41 डिग्री पार कर चुका है। चुभन भरी गर्मी से मनुष्यों के साथ ही वन्यजीवों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ऐसी स्थिति में शहर से सटे पिपरी-मेधे के करुणाश्रम में वन्यजीवों को भीषण गर्मी से राहत दिलाने के लिए कूलर लगाए गए हैं। पीएफए की टीम जरूरी उपाययोजना का पूरा ध्यान रखे हुए है।

फलस्वरूप यहां दुर्गा, जग्गू, मुन्ना, छाया व पुष्पा सहित सभी वन्यजीव चिल करते नजर आ रहे हैं, करुणाश्रम में वर्तमान में एक-ढाई वर्ष की बाधिन (दुर्गा), एक साढ़े तीन वर्षीय तेंदुआ (जम्मू) व 7 माह की मादा तेंदुए सहित तीन भालू जिसमें 7 वर्षीय मुन्ना, 3-3 वर्षीय छाया व पुष्पा के अलावा हिरण, चौसिंगा, नीलगाय, बंदर, मोर सहित अन्य पशु, पंछी आश्रित है।

यह सभी वन्यजीव करुणाश्रम में जख्मी हालत में या फिर लावारिस स्थिति में पाये जाने पर उपचार के लिए लाये जाते हैं। जो उचित इलाज के बाद यहीं पर घुलमिल जाते है, करुणाश्रम के सदस्य एक परिवार की तरह सभी वन्यजीवों की देखभाल करते है।

तीन दिन पहले जालना से एक मादा तेंदुआ बीमार हालत में करुणाश्रम में लाया गया है। उसके मुंह में इल्लियां हुई थी। तेंदुए की आयु 7 माह बताई गई। फिलहाल उसकी हालत में सुधार बताया गया, उसपर उपचार चल रहा है।

वहीं मादा शावक रायपुर (जंगली) परिसर में मिली थी। उसे प्यार से दुर्गा नाम दिया गया, आज यह मादा शावक ढाई वर्ष की होकर पूर्णतः तंदुरुस्त है। वाशिम जिले के जंगल से जग्गू (तेंदुए) को यहां लाया गया था।

उस समय जग्गू 5 दिन का होने के साथ ही उसका वजन केवल डेढ़ सौ ग्राम था। मां से बिछड़ने के बाद वह घायल भी हुआ था। उसकी आंख में चोट पहुंची थी, करुणाश्रम में जग्गू पर उपचार शुरू किया गया, उसके खानपान के साथ ही अन्य बातों पर ध्यान दिया गया।

अब जग्गू साढ़े चार वर्ष का हो गया है। पूरी तरह से तंदुरुस्त है। दोनों अपने नैसर्गिक अधिवास में जाने के लिए तैयार है। संबंधित विभाग से आदेश आने के बाद है।

उन्हें जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया पूर्ण होगी। दुर्गा व जग्गू को स्वतंत्र कक्ष में रखा गया है। गर्मी से उन्हें राहत मिले इसलिए कक्ष के सामने कूलर की व्यवस्था की गई है।

शेड की छत पर ठंडी घास रखी जाती है। उनके खानपान की ओर विशेष ध्यान रखा जाता है। यहां कृत्रिम जलकुंड भी तैयार किये गए है। जहां घंटों वन्यजीव बैठे रहते है।

दिए जाते हैं रसिले फल, बर्फ के गोले

करुणाश्रम में सात वर्षीय मुन्ना भालू सहित छाया व पूष्या नामक तीन वर्षीय मादा भालू भी है। गर्मी से इन वन्यजीवों को राहत मिले इसके लिए उनका परिसर ठंडा रखा जाता है।

शेड की छत पर नदी में उगने वाली ठंडी घास रखी जाती है। जगह-जगह तीन बड़े कूलर लगाये गए हैं। सभी वन्यजीवों को फ्रिजर में रखे रसिले ठंडे फल, बर्फ के गोले, हरी घास सहित अन्य खाद्य पदार्थ दिये जाते हैं, उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा न हो इस ओर पुरा ध्यान रखा जाता है।

जरूरी उपाययोजना पर देते हैं ध्यान कराणाश्रम में आने वाले वन्यजीवों के साथ हमें लगाव हो जाता है। उनके उपचार पर पूरा ध्यान दिया जाता है। वर्तमान में मादा बाधीन, तेंदुआ, भालू, बंदर, मोर, हिरण व अन्य वन्यजीव यहां आश्रित है उन्हें गर्मी से राहत दिलाने के लिए जरूरी उपाययोजना की गई है। वन विभाग की अनुमति के बाद ही सभी वन्यजीवों की जंगल में छोड़ा जाता है।

-करुणाश्रम, आशीष गोस्वामी संचालक

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