Wardha Drought: खरीफ 2026 के दौरान कम बारिश और अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते सरकार ने राज्य के 265 तहसीलों में सूखा घोषित किया है। इसमें वर्धा जिले के 7 तहसीलों का समावेश किया गया। सूखा प्रबंधन संहिता 2016 के तहत ट्रिगर-1 लागू किया गया है। राज्य सरकार ने इन क्षेत्रों में विशेष उपाय योजनाएं और विभिन्न रियायतें लागू करने का निर्णय लिया है।
इस सूची में जिले के कारंजा तहसील का समावेश न होने से क्षेत्र के किसानों में भारी असंतोष पनप रहा है। सूखाग्रस्त सूची में कारंजा तहसील का भी समावेश किया जाए, ऐसी मांग क्षेत्र के किसान कर रहे हैं।
जून से अब तक हुई बारिश में कमी और अन्य प्रभावित करने वाले घटकों के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया। संबंधित जिलाधिकारियों को तत्काल फसलों का पंचनामा शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। सर्वेक्षण किए गए क्षेत्रों में फसलों की स्थिति दर्शाने वाले छायाचित्र और जीपीएस निर्देशांक संकलित किए जाएंगे। फसल की स्थिति संबंधी विस्तृत रिपोर्ट तत्काल शासन को प्रस्तुत करनी होगी।
सूखाग्रस्त सूची में जिले के वर्धा, आर्वी, आष्टी, सेलू, देवली, हिंगनघाट व समुद्रपुर तहसील का समावेश है। इन तहसीलों में किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने विशेष उपाय योजनाओं को मंजूरी दी है। इसके तहत जमीन के राजस्व में छूट, फसल ऋण का पुनर्गठन और कृषि संबंधी कर्ज की वसूली पर स्थगन दिया जाएगा। कृषि पंपों के चालू बिजली बिल में भी छूट मिलेगी। 7.5 हॉर्सपावर तक के कृषि पंपों का बिजली बिल पहले ही माफ किया जा चुका है।
अब इससे अधिक क्षमता वाले पंपों को भी इस छूट का लाभ मिलेगा। इसके अलावा शालेय और महाविद्यालयीन विद्यार्थियों को परीक्षा शुल्क से छूट दी जाएगी। रोहयो के तहत कार्य के मानकों में शिथिलता लाकर अधिक से अधिक काम शुरू किए जाएंगे। पेयजल की आवश्यकता वाले क्षेत्रों में टैंकरों से पानी उपलब्ध कराया जाएगा। जिन गांवों में पानी की किल्लत घोषित की गई है, वहां किसानों के कृषि पंपों के बिजली कनेक्शन नहीं काटे जाएंगे।
जिला कृषि अधीक्षक अरविंद उपरीकरण ने बताया कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों में सर्वेक्षण के आदेश जारी किए जाएंगे। इसके तहत रैंडम आधार पर 10 प्रतिशत गांवों में ग्राउंड टुथिंग की जाएगी। प्रत्येक गांव में मुख्य फसल के पांच प्लॉट के जियो-टैग फोटो लेना अनिवार्य रहेगा। राजस्व, कृषि एवं ग्राम विकास विभाग की संयुक्त टीम गठित कर फसलों की स्थिति का पंचनामा किया जाएगा।
सूखे से प्रभावित क्षेत्रों में खेती पर निर्भर किसानों, खेतिहर मजदूरों और अन्य जरूरतमंदों को अनाज की कमी न हो, इसके लिए आवश्यक व्यवस्था की जाएगी। पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही जल संरक्षण के कार्य भी शुरू किए जाएंगे। पहले जारी किए गए शासनादेशों के अनुसार पेयजल और पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था का नियोजन किया जाएगा। राज्य सरकार ने इन उपाययोजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा फसल नुकसान के आकलन की प्रक्रिया तत्काल पूरी करने के निर्देश दिए हैं।