प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया) 
वर्धा

गर्मी से पहले एक्शन मोड में वर्धा प्रशासन, जलसंकट से निपटने की तैयारी तेज, पालकमंत्री पंकज भोयर ने दिए निर्देश

Wardha News: गर्मी में संभावित जलसंकट से निपटने के लिए वर्धा जिला प्रशासन ने कार्ययोजना की प्रक्रिया तेज कर दी है। पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर के निर्देश पर पंचायत स्तर से प्रारूप मंगवाए जा रहे हैं।

आकाश मसने

Wardha Summer Water Plan: गर्मी के दिनों में संभावित जलसंकट से निपटने के लिए वर्धा जिला प्रशासन हर साल विशेष उपाययोजना पर जोर देता है। पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर ने हाल ही में बैठक बुलाकर समय रहते कार्ययोजना तैयार करने और उपाययोजना प्रारंभ करने के निर्देश दिए। इसके फलस्वरूप जिले में पंचायत स्तर पर जायजा बैठकें ली जा रही हैं और प्रारूप मंगवाए जा रहे हैं।

अब तक जिला पंचायत के ग्रामीण जलापूर्ति विभाग की ओर से वर्धा, हिंगनघाट, देवली, आर्वी, आष्टी व कारंजा पंचायतों से प्रारूप प्राप्त हुए हैं, जबकि समुद्रपुर और सेलू से अभी तक प्रारूप प्राप्त नहीं हुए हैं। सभी प्राप्त प्रारूपों की समीक्षा के बाद संभावित जलसंकट से निपटने के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी और इसे जिलाधिकारी की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। अनुमान है कि एक सप्ताह के भीतर संभावित कार्ययोजना तैयार हो जाएगी।

पंचायत समितियों की रिपोर्ट के आधार पर बनी है कार्ययोजना

हर साल जिला पंचायत के ग्रामीण जलापूर्ति विभाग द्वारा सभी पंचायत समितियों से प्राप्त रिपोर्टों के आधार पर कार्ययोजना तैयार की जाती है और इसे तीन चरणों में रखा जाता है। गत वर्ष, प्रथम चरण में अक्टूबर से दिसंबर के दौरान 3 गांवों में 3 उपाययोजना शामिल की गई थीं। दूसरे चरण में जनवरी से मार्च के दौरान 239 गांवों में 449 उपाययोजना रखी गईं।

मुख्य तीसरे चरण में अप्रैल से जून के दौरान 260 गांवों में 413 उपाययोजना पर काम किया गया। दूसरे चरण में अनुमानित खर्च 10 करोड़ 35 लाख 41 हजार और तीसरे चरण में 9 करोड़ 36 लाख 5 हजार रुपये बताया गया था। गत वर्ष 501 गांवों में जलसंकट के आसार बताए गए थे, जिनमें 865 उपाययोजनाओं को मंजूरी दी गई थी। इनमें से कई कार्य अब भी शेष होने की जानकारी है।

इन उपाययोजनाओं पर रहता है जोर

जिले में संभावित जलसंकट वाले गांवों में कार्ययोजना में दर्ज उपाययोजनाओं पर प्राथमिकता दी जाती है। इसमें सार्वजनिक कुओं का गहराईकरण, निजी कुओं का अधिग्रहण, टैंकर और बैलगाड़ी से जलापूर्ति, नल योजना का विशेष सुधार, आवश्यकतानुसार जलापूर्ति योजना, नई बोरवेल का निर्माण, पुरानी बोरवेल की मरम्मत, प्रगतिपथ पर नल योजना के काम पूरे करना शामिल हैं।

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