दादाराव केचे-सुमित वानखड़े  (सोर्सः सोशल मीडिया)
वर्धा

एक मंच पर दिखे सुमित वानखड़े और दादाराव केचे, भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी खत्म होने की जगी उम्मीद

Arvi BJP Factionalism: स्वर्गीय यादवराव केचे की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में विधायक सुमित वानखड़े और पूर्व विधायक दादाराव केचे एक साथ मंच पर नजर आए।

आंचल लोखंडे

Wardha BJP Politics: स्वर्गीय यादवराव केचे अनुदानित आश्रमशाला, नारा में हाल ही में पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर की प्रमुख उपस्थिति में यादवराव केचे की प्रतिमा का अनावरण किया गया। कार्यक्रम में विधायक सुमित वानखड़े, पूर्व सांसद रामदास तड़स सहित भाजपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इस दौरान विधायक वानखड़े और पूर्व विधायक दादाराव केचे के एक ही मंच पर आने से भाजपा कार्यकर्ताओं में चल रही चर्चाओं को विराम मिलने की उम्मीद जताई गई।

दरअसल, कुछ दिनों पूर्व आर्वी में पूर्व विधायक दादाराव केचे की पहल पर भाजपा के माध्यम से आयोजित ‘देवा भाऊ दहीहंडी उत्सव’ में विधायक सुमित वानखड़े, पूर्व सांसद रामदास तड़स और भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी थी।

आर्वी विधानसभा क्षेत्र में कमल खिलाने में भूमिका

इसके बाद अपने सार्वजनिक भाषण में दादाराव केचे ने पार्टी में उनके साथ हो रहे कथित अन्याय और आंतरिक गुटबाजी को लेकर नाराजगी व्यक्त की थी। केचे ने कहा था कि वर्ष 1982 से उन्होंने भाजपा को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए काम किया। स्कूटर से प्रचार करते हुए उन्होंने वर्धा जिले में पहली बार आर्वी विधानसभा क्षेत्र में कमल खिलाने में भूमिका निभाई।

बीजेपी नेताओं की मंच पर दिखी एकजुटता

उनके अनुसार, उनके कार्यकाल में पार्टी में गुटबाजी नहीं थी, लेकिन पिछले कुछ समय से पार्टी के भीतर मतभेद बढ़े हैं। उन्होंने कहा था कि कार्यकर्ता ही संगठन की ताकत है और यदि कार्यकर्ताओं के साथ इसी तरह का व्यवहार जारी रहा तो उन्हें भी इस संबंध में विचार करना पड़ेगा।

नारा में आयोजित प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम को लेकर भी केचे ने अपने भाषण में कहा कि उन्हें यह आशंका थी कि उनके पिता की प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम में पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर, विधायक सुमित वानखड़े और पूर्व सांसद रामदास तड़स उपस्थित होंगे या नहीं। सभी के उपस्थित रहने पर उन्होंने आभार व्यक्त किया।

बैनरों से भी केचे का फोटो गायब होने की चर्चा

कारंजा तहसील में भाजपा के बैनरों पर पूर्व विधायक दादाराव केचे की तस्वीर दिखाई नहीं देने का मुद्दा भी कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। सुधीर दिवे के जन्मदिन के अवसर पर कारंजा में भाजपा के राजनीतिक पदाधिकारियों की ओर से बड़े पैमाने पर शुभकामना बैनर लगाए गए हैं।

इन बैनरों पर केचे का फोटो नहीं होने से कुछ कार्यकर्ताओं में नाराजगी होने की चर्चा है। ऐसे में नारा का कार्यक्रम और एक ही मंच पर वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति को पार्टी के भीतर चल रही राजनीतिक चर्चाओं के संदर्भ में देखा जा रहा है।

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