वर्धा जिले की आर्वी तहसील के निंबोली (शेडे) में कार्रवाई।
खेत तालाबों से करीब 2,700 किलो जीवित प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली जब्त।
मत्स्य व्यवसाय, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने चलाया अभियान।
जब्त मछलियों का वैज्ञानिक तरीके से निपटारा किया गया।
विभाग ने मछली के अवैध पालन और बिक्री नहीं करने की अपील की।
Wardha Arvi Illegal African Thai Magur Fish Seized: वर्धा जिले की आर्वी तहसील के निंबोली (शेडे) परिसर में मत्स्य व्यवसाय विभाग ने प्रतिबंधित अफ्रीकन थाई मांगुर मछली के अवैध पालन पर कार्रवाई की। दो दिन के अभियान में खेत तालाबों से करीब 2,700 किलो जीवित मछलियां जब्त कर उनका वैज्ञानिक तरीके से निपटारा किया गया।
वर्धा जिले, प्रतिबंधित अफ्रीकन थाई मांगुर मछली के अवैध पालन के खिलाफ मत्स्य व्यवसाय विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। आर्वी तहसील के मौजा निंबोली (शेडे) परिसर में लगातार दो दिनों तक चलाए गए विशेष अभियान के दौरान खेत तालाबों से करीब 2,700 किलो जीवित थाई मांगुर मछलियां जब्त की गईं। बाद में इन मछलियों का वैज्ञानिक तरीके से निपटारा किया गया।
यह कार्रवाई मत्स्य व्यवसाय के प्रादेशिक उपआयुक्त सुनील जांभुले के मार्गदर्शन में की गई। अभियान में मत्स्य व्यवसाय, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम शामिल रही।
कार्रवाई के दौरान मत्स्य व्यवसाय विभाग के सहायक आयुक्त स्वप्नील वालदे, मत्स्य व्यवसाय विकास अधिकारी राहुल जाधव, आर्वी के पुलिस उपनिरीक्षक महेश राठोड़, हवलदार मंगेश वाघाडे और चेतन बोरकर उपस्थित थे। इसके अलावा नेरी के तलाठी अमोल खंडारे, राजस्व सेवक अमोल शेंडे तथा निंबोली (शेडे) की उपसरपंच सुरेखा कदम की मौजूदगी में जब्ती और निपटारे की प्रक्रिया पूरी की गई।
मत्स्य व्यवसाय विभाग के सहायक आयुक्त स्वप्नील वालदे ने नागरिकों से प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली का पालन और बिक्री नहीं करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जिले में कहीं भी इस मछली का अवैध पालन या बिक्री होते दिखाई दे, तो इसकी सूचना तत्काल मत्स्य व्यवसाय कार्यालय को दी जाए। सूचना मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
विभाग के अनुसार, अफ्रीकन थाई मांगुर प्रदूषित पानी में भी पनप सकती है और घटिया खाद्य पदार्थों पर जीवित रह सकती है। इसके सेवन से मानव स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्परिणाम होने की आशंका जताई जाती है।
यह मछली मांसाहारी और आक्रामक प्रवृत्ति की होती है। इसके कारण स्थानीय मछली प्रजातियों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। इसके अवैध पालन से स्थानीय मछली पालकों को भी उचित बाजार और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलने में बाधा उत्पन्न होती है। इसी वजह से विभाग ने इसके अवैध पालन और बिक्री पर रोक के नियमों का पालन करने की अपील की है।