Wardha Cremation Ground: देश को आजाद हुए 80 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं, लेकिन जिले के ग्रामीण अंचल में आज भी नागरिक बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। एक ओर जिले में विभिन्न विकास कार्यों को गति दी जा रही है और सरकारी इमारतें खड़ी की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर जगह के अभाव में वर्धा जिले के 33 गांवों में अब तक श्मशानभूमि उपलब्ध नहीं है।
इसके चलते ग्रामीणों को किसी की मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार के लिए गांव की सीमा से बाहर खुले स्थान अथवा खेतों का सहारा लेना पड़ रहा है। बारिश और गर्मी के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। वर्धा जिला किसान आत्महत्याओं के लिए भी संवेदनशील रहा है।
सेवाग्राम की धरती से महात्मा गांधी ने देश की आजादी की लड़ाई को नई दिशा दी थी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हमेशा गांवों के विकास और ग्रामीण भारत की मजबूती पर जोर देते थे। उनका मानना था कि गांवों का विकास ही देश की प्रगति का आधार है। सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन जिले के कई गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
श्मशानभूमि जैसी आवश्यक सुविधा का 33 गांवों में उपलब्ध न होना गंभीर स्थिति को दर्शाता है। इन गांवों में किसी नागरिक की मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार खुले स्थान अथवा खेतों में करना पड़ता है। इससे मृतक के परिजनों के साथ ही आसपास के नागरिकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बारिश के दिनों में अंतिम संस्कार के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराना और भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों ने संबंधित गांवों में श्मशानभूमि के लिए जगह उपलब्ध कराने तथा निर्माण कार्य तत्काल शुरू करने की मांग की है।
पंचायत विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जिले की विभिन्न तहसीलों के 33 गांव श्मशानभूमि से वंचित है। इनमें वर्षा तहसील का नंदौरा, देवली तहसील के चिटकी और नंदपुर, सेलू तहसील के जुनगड, गायमुख, बोथली, हिवरा, पहेलानपुर, कामठी, सालई (पेठ) और गोवदा, आर्वी तहसील के सालदरा, कृष्णापुर और खैरी, आष्टी तहसील के दुगवाडा, पांढुर्णा, लिंगापुर, मोई, मुबारकपुर, ठेका कोल्हा, बांबर्डा, बोरखेडी, कारंजा तहसील के बांगडापुर, ढंगा, नागलवाडी और हेटी, हिंगनघाट तहसील के गंगापुर, आजंती, रिमडोह और सोनगांव (रा.) तथा समुद्रपुर तहसील के सावंगी (झाडे), शेगांव (गो.) और जिरा गांव शामिल हैं।
इनमें देवली तहसील के लक्ष्मीनारायणपुर ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले चिटकी गांव में सीएडी कैंप लगा होने के कारण श्मशानभूमि निर्माण के लिए अनुमति नहीं होने की बात पंचायत विभाग की रिपोर्ट में कही गई है।