जलशुद्धिकरण केंद्र  सोर्स: सोशल मीडिया
वर्धा

वर्धा की 209 करोड़ की जलापूर्ति योजना पर ब्रेक, 14 गांवों को मिलना था लाभ, वरिष्ठ स्तर पर अटका प्रस्ताव

Wardha Water Crisis: वर्धा की 209.65 करोड़ की नई जलापूर्ति योजना वरिष्ठ स्तर पर अटकी है। 205 किमी पाइपलाइन, 14 जलकुंभ और 29 एमएलडी जलशुद्धिकरण केंद्र का प्रस्ताव सीमा विस्तार के मुद्दे में उलझा है।

मनीषा बोंदरे

Highlights

  • वर्धा और आसपास के 14 गांवों के लिए ₹209.65 करोड़ की जलापूर्ति योजना प्रस्तावित।

  • अक्टूबर 2025 में वरिष्ठ स्तर पर भेजा गया प्रस्ताव अब तक मंजूरी की प्रतीक्षा में।

  • वर्ष 2057 तक की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई थी योजना।

  • 205 किलोमीटर नई वितरण पाइपलाइन और 14 नए जलकुंभ बनाने का प्रस्ताव।

  • शहर की सीमा विस्तार और कुछ ग्राम पंचायतों के विरोध को मंजूरी में बाधा बताया जा रहा है।

Wardha Water Supply Scheme Water Project Stalled: वर्धा शहर और आसपास के 14 गांवों की वर्ष 2057 तक की जलापूर्ति जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रस्तावित 209.65 करोड़ की योजना फिलहाल अटकी हुई है। अक्टूबर 2025 में वरिष्ठ स्तर पर भेजे गए प्रस्ताव की मंजूरी में शहर की सीमा विस्तार का मुद्दा बाधा बन रहा है।

209 करोड़ की जलापूर्ति योजना पर ब्रेक

वर्धा, वर्धा शहर और आसपास के गांवों में बढ़ती आबादी तथा पानी की मांग को देखते हुए तैयार की गई नई जलापूर्ति योजना फिलहाल अटक गई है। महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण (मजीप्रा) ने करीब 209 करोड़ 65 लाख 87 हजार रुपये की लागत से यह योजना तैयार की थी। अक्टूबर 2025 में इसका प्रस्ताव वरिष्ठ स्तर पर भेजा गया, लेकिन अब तक मंजूरी नहीं मिलने से परियोजना का भविष्य स्पष्ट नहीं है।

इस योजना में वर्धा शहर के साथ पिपरी (मेघे) सहित आसपास के 14 गांवों को शामिल किया गया था। इसका उद्देश्य बढ़ते शहरीकरण और करीब साढ़े चार लाख की आबादी की दीर्घकालीन जलापूर्ति जरूरतों को पूरा करना था।

सीमा विस्तार बना प्रमुख अड़चन

जानकारी के अनुसार, भविष्य में वर्धा शहर की सीमा बढ़ने की संभावना को ध्यान में रखते हुए योजना के प्रस्ताव में कुछ संशोधन करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद आवश्यक सुधार किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, शहर की सीमा विस्तार को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से योजना की मंजूरी प्रभावित हो रही है।

सूत्रों के अनुसार, शहर से सटी कुछ ग्राम पंचायतों ने सीमा विस्तार का विरोध किया है। ऐसे में प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी कब मिलेगी, यह स्पष्ट नहीं है। योजना में देरी से शहर और आसपास के गांवों की भविष्य की जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

205 किलोमीटर पाइपलाइन और 14 नए जलकुंभ

योजना के तहत करीब 205 किलोमीटर नई वितरण पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव था। इसके साथ ही पुरानी प्रादेशिक जलापूर्ति योजना के विभिन्न कार्यों की मरम्मत भी की जानी थी, ताकि मौजूदा व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।

प्रस्ताव में चेलाकेली स्थित पुराने हेडवर्क्स की मरम्मत और नए हेडवर्क्स का निर्माण शामिल था। हनुमान टेकड़ी स्थित पुराने जलशुद्धिकरण केंद्र की मरम्मत के साथ 29 एमएलडी क्षमता वाले नए जलशुद्धिकरण केंद्र के निर्माण की भी योजना थी।

वर्ष 2057 तक की जरूरतों पर था फोकस

वर्धा शहर और आसपास के क्षेत्रों में आबादी, शैक्षणिक संस्थानों और शहरी गतिविधियों के विस्तार को देखते हुए वर्ष 2057 तक की जलापूर्ति जरूरतों का आकलन किया गया था। इसके तहत सभी 14 गांवों में अलग-अलग क्षमता के 14 नए जलकुंभ बनाने और अन्य तकनीकी तथा सहायक कार्यों को पूरा करने का प्रस्ताव रखा गया था।

अब इस महत्वाकांक्षी योजना की मंजूरी और आगे की प्रक्रिया पर नजर है। प्रस्ताव लंबित रहने के कारण परियोजना कब शुरू होगी और नागरिकों को इसका लाभ कब मिलेगा, इस पर फिलहाल कोई स्पष्ट समय-सीमा सामने नहीं आई है।

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