वर्धा पशुओं का तांडव (फोटो नवभारत) 
वर्धा

वर्धा में आवारा पशुओं का आतंक, प्रशासन की कार्रवाई कागजों तक सीमित, नागरिकों में हादसे का खौफ

Wardha Traffic Jam: बाजारों और मुख्य मार्गों पर आवारा पशुओं और सांडों के जमावड़े से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। नगर परिषद की दंडात्मक कार्रवाई कागजों तक सीमित होने से पशुपालकों के हौसले बुलंद हैं।

रूपम सिंह

Animal Welfare Act News: वर्धा शहर के प्रमुख मार्गों सहित मार्केट परिसर में आवारा पशुओं की चराई और सांडों की टक्कर की घटनाएं अब आम होती जा रही हैं। इसके चलते हर समय दुर्घटना का डर बना रहता है। नगर परिषद प्रशासन ने पूर्व में आवारा पशुओं को पकड़कर कांजी हाउस में रखने तथा संबंधित पशुपालकों पर दंडात्मक कार्रवाई करने की घोषणा की थी, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

शाम के समय शहर के बाजार और मुख्य मार्गों पर अत्यधिक भीड़ रहती है। इस दौरान विद्यार्थी, खरीदारी के लिए आने वाले महिला-पुरुष तथा वृद्ध नागरिकों की आवाजाही सबसे अधिक होती है। पहले से ही मार्केट की सड़कें संकरी होने के कारण यातायात जाम की स्थिति बनी रहती है। ऐसे में सड़कों पर खुलेआम घूमते आवारा पशु और सांडों की आपसी टक्कर से किसी भी समय गंभीर दुर्घटना हो सकती है।

हाल ही में नगर परिषद द्वारा आवारा पशुओं के नियंत्रण के लिए पशुपालकों पर दंडात्मक कार्रवाई संबंधी आदेश जारी किया गया था। इससे पहले भी पशुओं को पकड़कर कांजी हाउस में रखने की बात कही गई थी, लेकिन यह सारी कार्रवाई केवल कागजातों तक ही सीमित रह गई है। इसी कारण शहरवासियों में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर आवारा पशुओं का स्थायी बंदोबस्त कब किया जाएगा।

लोगों में डर का माहौल

मार्केट की संकरी सड़कों पर पहले से ही भीड़ रहती है। पशुपालक अपने पशुओं को चराई के लिए खुला छोड़ देते हैं, जिससे कई बार पशु विचलित होकर राहगीरों की ओर दौड़ पड़ते हैं। ऐसे में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है और बाजार में आने-जाने वाले लोगों में डर का माहौल है। जयेश चौहान ने बताया की “शाम के समय बाजार में भीड़ अधिक रहती है। ऐसे में सड़कों पर घूमते पशुओं से हमेशा हादसे का डर बना रहता है।”

पशुपालकों पर सख्त कार्रवाई की मांग

व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि पशुपालक अपने पशुओं को सड़कों पर छोड़कर न केवल पशुओं बल्कि लोगों की जान भी खतरे में डाल रहे हैं। पशु कचरे में पड़े प्लास्टिक का सेवन कर रहे हैं और सांडों की टक्कर की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। वर्षों से सख्त कार्रवाई नहीं होने के कारण आवारा पशुओं की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है।

प्रसन्ना उमरे ने बताया की “पशुपालकों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है, अन्यथा हालात और बिगड़ेंगे।” वर्धा शहरवासियों की मांग है कि नगर परिषद जल्द से जल्द ठोस कदम उठाए, ताकि आवारा पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके और आमजन को राहत मिल सके।

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