प्रकाश अंबेडकर (सोर्स: सोशल मीडिया)
वर्धा

छात्रों के साथ अपराधियों जैसा सलूक! वर्धा के हिंदी विवि में 6 दलित छात्रों के निष्कासन पर गरजे प्रकाश अंबेडकर

Dalit Students Expulsion Wardha: वर्धा के हिंदी विश्वविद्यालय में 6 दलित छात्रों के निष्कासन पर प्रकाश अंबेडकर ने जताई नाराजगी। जानिए आंदोलन और प्रशासनिक कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट।

गोरक्ष पोफली

Prakash Ambedkar Reacts Expulsion Dalit Students Wardha: महाराष्ट्र के वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले दलित-बहुजन समाज के 6 छात्रों को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अपराधियों की तरह दंडित किया गया है। इन छात्रों का अपराध सिर्फ इतना था कि वे छात्रावास में रहने की बेहतर सुविधाओं, मेस व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे थे और प्रशासन की गंभीर लापरवाही पर सवाल उठा रहे थे।

लेकिन, छात्रों की बुनियादी गरिमा और जवाबदेही की मांगों को सुनने के बजाय, वर्धा विश्वविद्यालय के प्रशासन ने प्रतिशोध का रास्ता चुना। प्रशासन ने आवाज उठाने वाले इन छात्रों को इनाम के तौर पर एफआईआर थमा दी और उन्हें उन छात्रावासों से निष्कासित कर दिया जहां वे बुनियादी सम्मान की मांग कर रहे थे।

छात्रों का निरंतर सत्याग्रह

इस दमनकारी कार्रवाई के खिलाफ पीड़ित छात्र पिछले 3 सितंबर से विश्वविद्यालय परिसर के बाहर खुले में धरने पर बैठने को मजबूर हैं। छात्रों का यह शांतिपूर्ण सत्याग्रह आज 62वें दिन भी लगातार जारी है, जिसे वर्धा शहर के अमन-पसंद लोगों और विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक संगठनों का व्यापक समर्थन मिल रहा है।

अब इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर वंचित बहुजन अघाड़ी के प्रमुख एडवोकेट प्रकाश अंबेडकर (बालासाहेब अंबेडकर) का भी मजबूत साथ मिल गया है। प्रकाश अंबेडकर ने प्रशासन के इस रवैये को ब्राह्मणवादी और मनुवादी करार देते हुए इसकी तीखी निंदा की है।

उन्होंने घोषणा की है कि वंचित बहुजन अघाड़ी और उनका छात्र संगठन 'सम्यक विद्यार्थी आंदोलन' इन पीड़ित छात्रों के साथ मजबूती से खड़ा है और इस दमनकारी कार्रवाई के खिलाफ उन्हें हर आवश्यक कानूनी सहायता प्रदान करेगा। उन्होंने साफ कहा कि इन छात्रों की आवाज को दबाया नहीं, बल्कि सुना जाना चाहिए।

छात्र नेताओं का आक्रोश

इस दमनकारी कार्रवाई को लेकर छात्रों और छात्र नेताओं का गुस्सा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। सम्यक विद्यार्थी आंदोलन हिंदी विश्वविद्यालय यूनिट के संयोजक निरंजन ओबेरॉय ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि प्रशासन अपनी तानाशाही और जातिवादी मानसिकता से बाज नहीं आता, तो छात्र पीछे हटने वाले नहीं हैं।

वहीं, शोध छात्र रामचंद्र ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वे इस विश्वविद्यालय को दलित-पिछड़े छात्रों की कब्रगाह नहीं बनने देंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि झूठी एफआईआर वापस नहीं ली गई, तो वे अपने आंदोलन को और व्यापक दिशा में लेकर जाएंगे क्योंकि यह सत्याग्रह अब विश्वविद्यालय के वजूद को बचाने में तब्दील हो गया है।

जनसंगठनों का व्यापक समर्थन

अब तक लगभग दो दर्जन से अधिक क्षेत्रीय और राष्ट्रीय संगठनों ने इस सत्याग्रह को अपना खुला समर्थन दिया है। सभी संगठनों ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय प्रशासन को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि छात्रों के साथ हो रहे दमन को तुरंत नहीं रोका गया, और उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर व विश्वविद्यालय में प्रवेश पर लगा प्रतिबंध वापस नहीं लिया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

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