देवली नगर परिषद (फाइल फोटो, सोर्स-सोशल मीडिया) 
वर्धा

देवली में नमो उद्यान भूमि विवाद, जिलाधिकारी ने बहुमत से पारित प्रस्ताव किया निरस्त

DM Cancels Municipal Resolution : देवली नगर परिषद के नमो उद्यान भूमि प्रस्ताव को जिलाधिकारी ने निरस्त कर दिया है, जिसके बाद शहर में राजनीतिक विवाद और चर्चाएं तेज हो गई हैं।

अनन्या तिवारी

District Magistrate Cancels Municipal Resolution: वर्धा जिले के देवली नगर परिषद की सामान्य सभा में 11 नगरसेवकों के बहुमत से पारित नमो उद्यान की भूमि परिवर्तन संबंधी प्रस्ताव को जिलाधिकारी ने निरस्त कर दिया है। इस निर्णय के बाद नगर परिषद के बहुमत से लिए गए फैसले की वैधता और महत्व को लेकर शहर में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

जानकारी के अनुसार, प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान 1 अक्टूबर 2025 को हुई बैठक में देवली के वर्धा रोड स्थित बालाजी लेआउट क्षेत्र में 4,837 वर्गमीटर भूमि पर नमो उद्यान विकसित करने का प्रस्ताव मंजूर किया गया था। बाद में नगर परिषद चुनाव संपन्न होने के बाद जब उद्यान निर्माण कार्य के लिए दर स्वीकृति का विषय स्थायी समिति के समक्ष आया, तब कुछ नगरसेवकों ने आपत्ति जताई।

पहले से विकसित उद्यान को लेकर उठे सवाल

आपत्ति जताने वाले नगरसेवकों का कहना था कि संबंधित लेआउट में पहले से ही उद्यान विकसित किया जा चुका है, ऐसे में उसी स्थान पर पुनः नमो उद्यान विकसित करने का औचित्य नहीं है। इस मुद्दे पर नगर परिषद की सामान्य सभा में भी विरोध दर्ज किया गया। इसके बाद मुख्याधिकारी नेहा आकोड़े ने विशेष सभा आयोजित कर विषय को मंजूरी के लिए रखा। मतदान में 11 नगरसेवकों ने भूमि परिवर्तन के पक्ष में तथा 6 नगरसेवकों ने विरोध में मतदान किया, जिसके चलते मूल प्रस्ताव को नामंजूर कर नई भूमि चयन का प्रस्ताव बहुमत से पारित किया गया।

भाजपा के दो गुटों में मतभेद

नमो उद्यान के लिए भूमि चयन को लेकर भाजपा के पूर्व सांसद एवं प्रदेश उपाध्यक्ष रामदास तड़स तथा विधायक राजेश बकाने के समर्थक गुटों के बीच मतभेद सामने आए। तड़स समर्थक गुट का मत था कि पहले से विकसित उद्यान होने के कारण नई भूमि का चयन किया जाए, जबकि बकाने समर्थक गुट प्रशासनिक कार्यकाल में स्वीकृत भूमि को ही बरकरार रखने के पक्ष में था।

मामला जिलाधिकारी के समक्ष पहुंचने पर प्रशासनिक स्वीकृति वाली भूमि को ही मान्यता दी गई।

मुख्याधिकारी की सिफारिश पर निरस्त हुआ प्रस्ताव

नगर परिषद की सामान्य सभा में कांग्रेस पार्टी के तीन तथा भाजपा के आठ नगरसेवकों सहित कुल 11 सदस्यों ने नई भूमि चयन के समर्थन में प्रस्ताव पारित किया था। हालांकि मुख्याधिकारी नेहा आकोड़े ने महाराष्ट्र नगर परिषद अधिनियम, 1965 की धारा 308 के तहत कार्रवाई करते हुए उक्त प्रस्ताव को निरस्त करने की अनुशंसा जिलाधिकारी को भेजी थी।

जिलाधिकारी द्वारा प्रस्ताव निरस्त किए जाने के बाद देवली शहर में यह चर्चा तेज हो गई है कि सामान्य सभा में बहुमत से पारित प्रस्तावों का वास्तविक महत्व क्या रह जाता है। इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति और नगर परिषद के अधिकारों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

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