Wardha Court Employees Protest: राज्य के द्वितीयक न्यायालयों में कार्यरत करीब 34 हजार न्यायालयीन कर्मचारियों के समान वेतन का प्रस्ताव 31 जनवरी 2025 से शासन स्तर पर लंबित है। अब तक मंजूरी नहीं मिलने से कर्मचारियों में नाराजगी है। लंबित प्रस्ताव पर तत्काल निर्णय लेकर समान वेतन लागू करने की मांग को लेकर राज्यभर के न्यायालयीन कर्मचारियों ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है।
इस संबंध में मुंबई में चारों महासंघों के पदाधिकारियों के साथ महाराष्ट्र के सभी जिलों के जिला अध्यक्षों एवं अन्य पदाधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में लंबित वेतनवृद्धि प्रस्ताव तथा शासन स्तर पर हो रही देरी पर चर्चा की गई। शासन द्वारा तत्काल निर्णय नहीं लिए जाने की स्थिति में चरणबद्ध आंदोलन करने का निर्णय लिया गया। आंदोलन के पहले चरण में 16 सितंबर को काली पट्टी बांधकर विरोध किया जाएगा। इसके बाद 16 और 17 अक्टूबर को दो दिनों तक काली पट्टी बांधकर न्यायालयीन कामकाज किया जाएगा।
इसके बावजूद मांगों का समाधान नहीं होने पर 5 नवंबर 2026 को वसुबारस के दिन सामूहिक अवकाश आंदोलन किया जाएगा। इसके बाद भी शासन ने मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो 6 और 7 नवंबर को न्यायालयीन कर्मचारी अन्नत्याग आंदोलन करेंगे।
मांगें मंजूर नहीं होने पर 17 नवंबर 2026 से राज्य के सभी द्वितीयक न्यायालयों के न्यायिक कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। वर्धा जिले के न्यायालयीन कर्मचारी भी इस राज्यव्यापी आंदोलन में सक्रिय रूप से सहभागी होंगे। आंदोलन के माध्यम से शासन से 31 जनवरी 2025 से लंबित समान वेतन के प्रस्ताव पर तत्काल निर्णय लेकर कर्मचारियों को न्याय देने की मांग की गई है। वर्धा जिले में चारों जिला न्यायालयीन कर्मचारी संगठनों के अध्यक्ष सतीश तांबुसकर, संदीप माडे, कमलाकर चापके और गोपाल साहू ने आंदोलन में शामिल होने की चेतावनी दी है। उन्होंने शासन से कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांग पर तत्काल सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है।