Bor Tiger Reserve Wardha: बोर टाइगर रिजर्व में बीटीआर-8 'युवराज' नामक बाघ के लापता होने का मामला ताजा ही है कि अब कोर क्षेत्र में प्राकृतिक आवास में छोड़ी गई 'भूमि' नामक बाधिन भी लापता होने की जानकारी सामने आई है। करीब एक माह से उसकी कोई लोकेशन नहीं मिलने से वन्यजीव प्रेमियों में चिंता बढ़ गई है। बोर टाइगर रिजर्व प्रशासन के अधिकारियों ने भी बाघिन के वर्तमान में बोर क्षेत्र में नहीं होने की पुष्टि की है।
समुद्रपुर तहसील के गिरड-खुर्सापार क्षेत्र में कुछ वर्ष पहले टीएफ-1 बाघिन ने चार शावकों को जन्म दिया था। इनमें से एक शावक की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। शेष तीन शावकों को टीएफ-1 ने शिकार का प्रशिक्षण दिया। बाद में ये शावक खेतों तक पहुंचकर पालतू मवेशियों का शिकार करने लगे। मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका को देखते हुए वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश पर तीनों शावकों को पकड़कर पिंजरे में रखा गया था। इनमें से अंतिम मादा शावक को जुलाई में बेहोश कर पकड़ा गया था।
कुछ समय पिंजरे में रखने के बाद उसे जुलाई के अंतिम सप्ताह में बोर टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया। शुरुआत में उसकी गतिविधियां कोर क्षेत्र में रहीं, लेकिन बाद में वह बफर क्षेत्र के सालई (कला) परिसर में पहुंची और वहां एक पालतू पशु का शिकार भी किया। इसके बाद वह फिर कोर क्षेत्र की ओर लौट गई। बाद में उसके प्रादेशिक वन क्षेत्र में चले जाने की संभावना जताई जा रही है।
टाइगर मॉनिटरिंग की एसओपी के अनुसार, प्राकृतिक आवास में छोड़े गए बाघों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखना आवश्यक है। ऐसे में 'भूमि' की लंबे समय से लोकेशन नहीं मिलने से बोर प्रशासन की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। वन्यजीव प्रेमियों ने बोर टाइगर रिजर्व और प्रादेशिक वन विभाग की संयुक्त टीम बनाकर बाघिन की तलाश करने की मांग की है। 'भूमि' के शरीर का पीला रंग अन्य बाघों की तुलना में काफी हल्का है।
इसी विशेषता के कारण उसे आसानी से पहचाना जा सकता है। संभवतः प्रादेशिक वन क्षेत्र में चली गई। बोर टाइगर रिजर्व के उपसंचालक मंगेश ठेंगडी ने बताया कि जुलाई के अंतिम सप्ताह में बाधिन को बोर के कोर क्षेत्र में छोड़ा गया था। शुरुआत में वह कोर क्षेत्र में रही, बाद में बफर क्षेत्र में गई। फिलहाल वह बोर टाइगर रिजर्व में नहीं है और संभवतः प्रादेशिक वन क्षेत्र में चली गई होगी।