Virar Alibag Multi Modal Corridor Forest Land Clearance: मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक विरार-अलिबाग मल्टी मॉडेल कॉरिडॉर के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पहल और राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे के आदेश के बाद राजस्व विभाग ने डहाणू तालुका के चंडीगाव की 30 हेक्टेयर सरकारी जमीन वन विभाग को हस्तांतरित करने की मंजूरी दे दी है। यह जमीन 1 रुपये प्रति वर्ग मीटर की नाममात्र दर पर दी जाएगी।
महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (MSRDC) द्वारा बनाए जा रहे इस 126 किमी लंबे कॉरिडॉर के लिए कुछ वन भूमि अधिग्रहित करनी थी। नियमों के अनुसार, जितनी वन भूमि ली जाती है उतनी ही गैर-वन भूमि वन विभाग को देनी पड़ती है। डहाणू की 30 हेक्टेयर जमीन मिलने से यह कानूनी अड़चन दूर हो गई। इससे परियोजना को गति मिलने वाली है।
यह 8-लेन का मल्टी मॉडेल कॉरिडॉर है। पहले चरण में नवघर (वसई, पालघर) से चिरनेर (उरण, रायगड) तक 80 किमी का हिस्सा बन रहा है। दूसरे चरण में इसे विरार और अलिबाग तक बढ़ाया जाएगा। इसकी कुल लंबाई 126 किमी होगी। इस कॉरिडॉर में सड़क के साथ-साथ मेट्रो, बस रैपिड ट्रांजिट और यूटिलिटी लाइन के लिए भी जगह रखी गई है।
विरार से अलिबाग का सफर जो अभी 3-4 घंटे का है, वह भविष्य में घटकर 1 घंटे रह जाएगा। पालघर, ठाणे, मुंबई और रायगड जिले सीधे जुड़ेंगे। इससे MMR की अर्थव्यवस्था बदलने वाली है। वाढवन बंदरगाह, मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेस-वे, समृद्धि महामार्ग और नवी मुंबई एयरपोर्ट से इस कॉरिडॉर को जोड़ा जाएगा।
माल ढुलाई तेज होगी और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट घटेगी। इससे विरार, वसई, भिवंडी, कल्याण, पनवेल, उरण जैसे इलाकों में नए औद्योगिक और आवासीय हब विकसित होंगे। मुंबई पर दबाव कम होगा। मुंबई-अहमदाबाद और मुंबई-गोवा हाईवे पर भीड़ घटेगी क्योंकि उत्तर-दक्षिण जाने वाला ट्रैफिक शहर में घुसे बिना बाहर से निकल जाएगा।
पूरे प्रोजेक्ट की लागत करीब 55,000 करोड़ रुपये है। पहले चरण के लिए 21,000 करोड़ मंजूर हुए हैं। जमीन अधिग्रहण का काम 70% पूरा हो चुका है। MSRDC का लक्ष्य 2029 तक पहले चरण को पूरा करने का है। इस प्रोजेक्ट को लेकर कुछ चुनौतियां भी हैं।
पर्यावरणविद मैंग्रोव और तटीय इलाकों पर असर को लेकर चिंता जता रहे हैं। MSRDC का कहना है कि सभी पर्यावरण मंजूरियां ली गई हैं और जरूरी वृक्षारोपण भी किया जाएगा।
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चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि 'यह कॉरिडॉर महाराष्ट्र के ग्रोथ इंजन को नई रफ्तार देगा। वन विभाग को जमीन देने के फैसले से काम में तेजी आएगी। विरार-अलिबाग कॉरिडॉर पूरा होने पर MMR का नक्शा बदल जाएगा और यह मुंबई से सटे जिलों के लिए विकास के नए दौर की शुरूआत होगी।'