Akola Election Campaign: अकोला मनपा चुनाव (सोर्सः सोशल मीडिया) 
महाराष्ट्र

अकोला में भाजपा का साथ देगी उद्धव की शिवसेना, उपमहापौर पद को लेकर बनेगी बात!

Akola News: अकोला मनपा में सत्ता गठन को लेकर हलचल तेज। भाजपा नेता विजय अग्रवाल का दावा शिवसेना ने विकास पर ठोस प्रस्ताव नहीं दिए, केवल उपमहापौर पद की मांग रखी भाजपा के पास 42 पार्षदों का समर्थन।

रूपम सिंह

Akola Municipal Corporation News: अकोला महानगर पालिका में सत्ता स्थापना को लेकर राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। भाजपा के मनपा चुनाव प्रमुख तथा पूर्व महापौर विजय अग्रवाल ने बुधवार दोपहर मीडिया से बातचीत में दावा किया कि शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे गुट) ने विकास कार्यों के लिए कोई ठोस प्रस्ताव नहीं दिया है, बल्कि उपमहापौर पद की मांग की है।

भाजपा का दावा

विजय अग्रवाल ने कहा कि शिवसेना (उबाठा) द्वारा पत्र परिषद में जिन मुद्दों का उल्लेख किया गया है, वे मूल रूप से भाजपा के ही एजेंडे का हिस्सा हैं और उसी अनुसार विकास कार्य पहले से ही चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि शिवसेना के कुछ पार्षदों ने विकास के मुद्दे पर भाजपा नेताओं से संपर्क साधने का संदेश दिया था। इसके बाद उन्होंने शिवसेना के विधायक नितिन देशमुख से संपर्क किया और फिर शिवसेना के जिला प्रमुख गोपाल दातकार से चर्चा की।

सत्ता स्थापना की रणनीति

अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि सत्ता स्थापना के लिए भाजपा कांग्रेस और एमआईएम को छोड़कर अन्य किसी भी दल या निर्दलीय को साथ लेने के लिए तैयार है। इसी क्रम में शिवसेना उबाठा से बातचीत की गई। उन्होंने बताया कि राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजीत पवार गुट) और सुनील मेश्राम की महानगर विकास समिति भाजपा के साथ है, जिनके कुल दो नगरसेवक हैं। इसके अलावा शिवसेना (शिंदे गुट) की एक पार्षद से भी चर्चा हुई है। भाजपा ने यह भी दावा किया कि एक निर्दलीय पार्षद आशीष पवित्रकार, जो पूर्व में भाजपा से जुड़े रहे हैं, उनसे भी संपर्क किया गया है। इस प्रकार भाजपा के पास कुल 42 पार्षदों का समर्थन है, जो सत्ता स्थापना के लिए पर्याप्त संख्या बल है।

भाजपा की भूमिका

विजय अग्रवाल ने कहा कि भाजपा बहुमत से अधिकतम सहमति के आधार पर जनहित में कार्य करना चाहती है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि समय-समय पर बदलती परिस्थितियों के अनुसार राजनीतिक भूमिका तय करनी पड़ती है।

शिवसेना की मांग

भाजपा का दावा है कि शिवसेना उबाठा ने उपमहापौर पद की मांग की है। इससे स्पष्ट होता है कि शिवसेना का ध्यान सत्ता में हिस्सेदारी पर अधिक है, जबकि भाजपा विकास कार्यों को प्राथमिकता देने का दावा कर रही है।

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