मुंबई: अपनी ही पार्टी के दो-तिहाई विधायकों को तोड़ कर महाराष्ट्र (Maharashtra)की राजनीति में भूचाल लाने वाले शिवसेना (Shiv Sena) के नेता और नगर विकास मंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) की बगावत का असर ठाणे (Thane), कल्याण (Kalyan), पालघर (Palghar) और आसपास के जिलों में दिखने लगा है।
ठाणे-पालघर,रायगढ़ जिलों में एकनाथ शिंदे के समर्थन में होर्डिंग,बैनर झलक रहे हैं। इन होर्डिंग बैनर से सीएम और शिवसेना पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे गायब हैं, जबकि एकनाथ शिंदे द्वारा उठाए गए राजनीतिक कदम के समर्थन में लगे होर्डिंग बैनर में शिवसेना प्रमुख स्व. बाल ठाकरे और स्व. आनंद दिघे के फोटो लगे हैं। ऐसे में स्पष्ट हो गया है कि शिंदे की भुमिका को लेकर उनके जिले के अलावा आसपास के जिलों से भी शिवसेना संगठन के लोग सहमत हैं।
शिवसेना को पहली बार सत्ता का स्वाद चखाने वाले ठाणे के शिवसैनिकों में शांति पसरी हुई है। ठाणे जिले में शिवसेना का केंद्र कहे जाने वाले दिघे के कार्यालय के नाम से प्रचलित टेम्भीनाका स्थित शिवसेना की मुख्य शाखा में शांति का माहौल है। यही स्थिति ठाणे में शिवसेना की हर शाखा की है। ठाणे महानगरपालिका में शिवसेना के 67 नगरसेवक हैं, बताया गया है कि ये सभी एकनाथ शिंदे के समर्थन में हैं। शिवसेना के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है,जब ठाकरे परिवार के खिलाफ बगावत करने वाले एक नेता के समर्थन में शिवसेना के सभी पदाधिकारी और नगरसेवक आ गए हों। यही स्थिति कल्याण, उल्हासनगर, भिवंडी, अम्बरनाथ, बदलापुर और पालघर में दिखाई दे रही है। शिवसेना के कल्याण, ठाणे जिला के सभी प्रमुख पदाधिकारी शिंदे के साथ हो लिए हैं। कई पदाधिकारियों का कहना है कि ठाणे शिवसेना का गढ़ है। आनंद दिघे के कट्टर शिष्य एकनाथ शिंदे ने शिवसेना का गढ़ साबूत रखा है।
बताया गया कि शिवसेना लगभग 400 नगरसेवकों की सूची तैयार हुई है, जो एकनाथ शिंदे गुट के साथ हैं, इसके अलावा एकनाथ शिंदे के पुत्र सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे, ठाणे के राजन विचारे,वाशिम की सांसद भावना गवली, पालघर के राजेंद्र गावित सहित 6 सांसद भी शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं। आगामी तीन-चार महीनों में होने वाले महानगरपालिका चुनाओं को देखते हुए शिवसेना के अधिकांश पूर्व नगरसेवक शिंदे के खेमें में आ गए हैं। शिवसेना के जिला प्रमुख नरेश म्हस्के ने कहा कि हम सभी नगरसेवक और पदाधिकारी एकनाथ शिंदे के साथ हैं।