Thane Palghar MLC Election News: महाराष्ट्र विधानपरिषद में स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं की 17 सीटों के लिए चुनाव की घोषणा हो चुकी है। विप सदस्यों का कार्यकाल खत्म होने के 3 साल 11 महीने बाद होने जा रहे इन चुनावों को लेकर महायुति में ही राजनीतिक घमासान देखने को मिल रहा है।
इसी साल हुए राज्य के मनपा चुनाव में बीजेपी शिवसेना को भारी जीत मिली है। अब विधानपरिषद की 17 सीटों पर महायुती का ही दावा है। इसके लिए 18 जून को वोटिंग और 22 जून को परिणाम घोषित होंगे।
विधानपरिषद की 17 सीटों में से एक ठाणे-पालघर सीट पर दावे को लेकर राजनीतिक गतिविधि तेज हो गई है। शिवसेना की इस सीट पर इस बार बीजेपी ने दावा कर दिया है। इसके पीछे बीजेपी नेताओं का तर्क है कि दोनों जिलो की स्थानीय स्वराज्य सस्थाओं में उनके सदस्यों की संख्या अधिक है।
विधानपरिषद की ठाणे-पालघर लोकल बॉडी सीट पर लगभग 18 साल तक स्व.वसंत डावखरे का कब्जा रहा। लेकिन 2016 में हुए चुनाव में शिवसेना के उपनेता रविंद्र फाटक ने उन्हें हराकर पहली बार यह सीट जीती। उनका टर्म 2022 में खत्म हो गया। चूंकि शिवसेना ने एनसीपी को हराकर इस सीट पर कब्जा किया था, इसलिए इस सीट पर शिवसेना का हक माना जा रहा है। शिवसेना के मुख्य नेता एकनाथ शिंदे के लिए भी ठाणे-पालघर विधानपरिषद की सीट प्रतिष्ठा की मानी जा रही है। संभावना है कि शिवसेना के रविंद्र फाटक ही महायुती के उम्मीदवार होंगे, लेकिन BJP द्वारा भी इस सीट पर अपना दावा किया गया है। चर्चा है कि इस बार BJP ठाणे-पालघर सीट पर राज्य के वनमंत्री गणेश नाईक के पुत्र पूर्व MP और संजीव नाईक को लड़ाना चाहती है।
ठाणे-पालघर विधानपरिषद की स्थानीय निकाय सीट पर इस समय बीजेपी का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। क्योंकि सबसे ज्यादा 444 वोटर्स BJP के पास हैं। जबकि दूसरे नंबर पर शिवसेना के पास 346 वोट हैं। इन दोनों ज़िलों में ऐसा पहली बार हुआ है। इससे पहले ये दोनों ज़िले शिवसेना के गढ़ थे। लेकिन, शिवसेना और एनसीपी में विभाजन के बाद BJP का दबदबा बढ़ गया है। अब BJP नंबर वन पार्टी है। इन आंकड़ों की वजह से BJP ने शिवसेना के लिए चुनौती खड़ी कर दी है।
वैसे ठाणे पालघर विप सीट पर कुल लगभग 1035 वोटर हैं। जिनमें से 790 वोटर शिवसेना-BJP गठबंधन के साथ हैं। अगर गठबंधन होता है, तो चुनाव एक तरफ़ा होगा, और महायुती का उम्मीदवार बड़े मार्जिन से जीतेगा। लेकिन, अगर दोनों पार्टियों की खींचतान में गठबंधन टूट जाता है, तो इन दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों को बाकी छोटी पार्टियों के 245 वोटों पर निर्भर रहना होगा। BJP को जीतने के लिए 516 वोट चाहिए। उनके पास 444 वोटर हैं, उन्हें सिर्फ़ 71 वोट चाहिए होंगे, जबकि शिवसेना के पास 326 वोट हैं। हालाकिं नीलेश सांबरे शिवसेना के डिप्टी लीडर हैं, इसलिए उनके पास जो 20 वोट हैं, वे शिवसेना के माने जाते हैं। इसलिए, शिवसेना के पास 346 वोट हैं। उन्हें 170 वोट की जरूरत पड़ेगी।
यदि शिवसेना और बीजेपी आमने-सामने लड़ती हैं, तो बहुजन विकास आघाड़ी के सर्वेसर्वा हितेंद्र ठाकुर 'किंग मेकर' हो सकते हैं। वसई विरार मनपा में उनके अपने 71 वोट हैं। इसलिए, इस चुनाव में उनके 71 वोटों की स्थिति निर्णायक हो सकती है। अगर दोनों पार्टियां अलायंस करती हैं, तो उनके वोटों की ज़रूरत नहीं होगी। इन दो जिलों में, कांग्रेस के पास 47, NCP-शरद पवार ग्रुप के पास 38, NCP-अजीत पवार ग्रुप के पास 29, शिवसेना-उद्धव ठाकरे ग्रुप के पास 18, MNS के पास 6, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया-मार्क्सिस्ट के पास 6, समाजवादी पार्टी के पास 6, AIMIM के पास 5, CPI(M) के पास 18 वोट हैं।
महाराष्ट्र लेजिस्लेटिव काउंसिल में कुल 78 सदस्य हैं। इनमें से 30 सदस्य विधानसभा के MLA द्वारा चुने जाते हैं। 22 सदस्य लोकल अथॉरिटी चुनाव क्षेत्रों से, 7 सदस्य टीचर और 7 ग्रेजुएट चुनाव क्षेत्रों से एवं 12 सदस्य गवर्नर द्वारा नियुक्त सदस्य होते हैं। इनमें से लोकल अथॉरिटी चुनाव क्षेत्र की 17 सीटों के लिए चुनाव की घोषणा हो चुकी है।
इस चुनाव के लिए नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों के नगरसेवक, जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति के अध्यक्ष वोटर हैं। राज्य में जिला परिषद चुनाव आरक्षण के मुद्दे पर नहीं हुए हैं। इसलिए, जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति के अध्यक्ष इस बार वोटर नहीं होंगे।
कुल 100 प्रतिशत वोटिंग न होने के कारण इन चुनावों पर आपत्ति जताई गई है। हालांकि, चुनाव आयोग 75 प्रतिशत वोटरों का क्राइटेरिया लागू करके ये चुनाव कराएगा। इस बीच, विधान परिषद चुनाव के लिए मशीनरी तैयार है। ठाणे-पालघर के कुल 18 पोलिंग स्टेशनों पर वोटिंग होगी। नोटिफिकेशन 25 मई को पब्लिश होगा। इच्छुक उम्मीदवार 1 जून तक अपना नॉमिनेशन फाइल कर सकते हैं। 2 जून को स्क्रूटनी होगी और 4 जून तक एप्लीकेशन वापस लिए जा सकते हैं।
महायुती में सीट शेयरिंग पर पेंच फंसा हुआ है। BJP 17 में से 13 सीटें मांग रही है, जबकि शिवसेना और NCP (अजीत पवार ग्रुप) 2-2 सीटें छोड़ रहे हैं। BJP ने इसके पीछे एक स्ट्रेटेजी बनाई हुई लगती है, कि शुरू में कम सीटें दी जाएं और बाद में एक-दो सीटें बढ़ा दी जाएं।
अगर दोनों पार्टियां गठबंधन में लड़ती हैं, तो चुनाव एकतरफ़ा होगा। यदि दोनों पार्टियों के उम्मीदवार आमने-सामने लड़ते हैं, तो चुनाव कांटे का होगा। कॉर्पोरेटर्स की 'कीमत' बढ़ेगी और हॉर्स ट्रेडिंग होगी, यह तो तय है। चूंकि वोटिंग सीक्रेट है, इसलिए कॉर्पोरेटर्स को 'कमाई' करने का बड़ा मौका मिलेगा।
ठाणे से नवभारत लाइव के लिए सूर्यप्रकाश मिश्र की रिपोर्ट