उल्हासनगर मनपा (फोटो नवभारत)
ठाणे

ठाणे के उल्हासनगर मनपा में 7 स्वीकृत नगरसेवकों की नियुक्ति पर रोक जारी, SC ने दिया हाई कोर्ट जाने का निर्देश

Thane Nominated Members Case: सुप्रीम कोर्ट ने ठाणे की महापौर और अरुण आशान की याचिकाएं खारिज कर दीं। स्वीकृत सदस्यों की नियुक्ति पर स्टे बरकरार है और 4 वीक में मामले के निपटारे का निर्देश दिया है।

अशोक वर्मा, आलोक उमाकृष्ण

Highlights

  • HC ने महापौर अश्विनी निकम और नेता अरुण आशान की दोनों याचिकाएं खारिज कीं।

  • 7 स्वीकृत नगरसेवकों की नियुक्ति पर हाई कोर्ट का स्थगन आदेश फिलहाल लागू रहेगा।

  • सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को चार सप्ताह में मामले का निपटारा करने का निर्देश दिया।

SC Stay Order On Ulhasnagar Nominated Members Appointment: ठाणे के उल्हासनगर-सर्वोच्च न्यायालय ने उल्हासनगर मनपा की महापौर अश्विनी निकम और सभागृह नेता अरुण आशान की दोनों याचिकाएँ खारिज कर दी हैं।

सर्वोच्च न्यायालय में उल्हासनगर महानगर पालिका की महापौर अश्विनी निकम और सभागृह नेता अरुण आशान द्वारा उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए स्थगन आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए याचिकाएँ दायर की गई थीं। यह स्थगन आदेश उल्हासनगर महानगर पालिका में स्वीकृत (नामनिर्देशित) सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया के संबंध में दिया गया था।

7 स्वीकृत सदस्यों की नियुक्ति बरकरार रखने की मांग

सर्वोच्च न्यायालय में याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि उच्च न्यायालय द्वारा उल्हासनगर महानगरपालिका में स्वीकृत सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया पर लगाया गया स्थगन आदेश उचित नहीं है। महापौर अश्विनी निकम और सभागृह नेता अरुण आशान ने इस आदेश को चुनौती देते हुए इसे रद्द करने का अनुरोध किया।

याचिकाकर्ताओं का पक्ष था कि महापौर द्वारा नियुक्त सात स्वीकृत सदस्यों की नियुक्तियों को बरकरार रखा जाना चाहिए। इनमें शिवसेना के पांच और भारतीय जनता पार्टी के दो सदस्य शामिल हैं। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने और नियुक्तियों को मान्यता देने की मांग की थी।

सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाएं खारिज

सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों याचिकाएं खारिज कर दीं और मामले में उच्च न्यायालय का रुख करने को कहा। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने महापौर अश्विनी निकम और सभागृह नेता अरुण आशान द्वारा दायर दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया तथा याचिकाकर्ताओं को उच्च न्यायालय का रुख करने के लिए कहा।

साथ ही, उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि संबंधित मामले का निपटारा चार सप्ताह के भीतर किया जाए। इस प्रकार, स्वीकृत सदस्यों की नियुक्ति पर उच्च न्यायालय द्वारा लगाए गए स्थगन आदेश को चुनौती देने वाली महापौर अश्विनी निकम और सभागृह नेता अरुण आशान की दोनों याचिकाएँ सर्वोच्च न्यायालय में खारिज हो गईं।

और स्वीकृत नगरसेवकों के चुनाव पर लगा स्टे अभी भी लागू रहेगा और स्वीकृत नगरसेवकों अब चार सप्ताह और इंतजार करना पड़ेगा। उच्च कोर्ट से अब क्या फैसला आता हैं इसपर सभी की नजर लगी हुई हैं।

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