मंत्री गणेश नाइक (pic credit; social media)
Thane News In Hindi: मनपा चुनाव के बाद अब ठाणे सहित जिले की महानगरपालिकाओं में सत्ता समीकरण पर चर्चा हो रही है। ठाणे, कल्याण-डोंबिवली की सत्ता में हिस्सेदारी पर बातचीत का दौर शुरू है।
इस बीच वन मंत्री गणेश नाईक ने राज्य के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गढ़ में ही उन पर निशाना साधा है। नाईक के बयान से एक बार फिर राजनीतिक माहौल गरम होने की संभावना जतायी जा रही है।
- गणेश नाईक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गढ़ वढ किसी का नहीं होता है। यदि पार्टी इजाजत दे, तो नामो-निशान मिटा दूं। हालांकि, नाईक ने साफ किया है कि यह उनकी व्यक्तिगत राय है। ठाणे शहर भाजपा अध्यक्ष संदीप लेले के नेतृत्व में पांचपाखड़ी इलाके में माघी गणेशोत्सव का आयोजन किया गया है। वन मंत्री गणेश नाईक रविवार को उसमें शामिल होने के लिए ठाणे आए हुए थे। इस दौरान पत्रकारों के सवालों के जवाब में उन्होंने एक बार फिर शिवसेना पर निशाना साधा।
- नाईक ने कहा कि हम गठबंधन नहीं चाहते थे। लेकिन युति होने के बाद नवी मुंबई में भी बातचीत करते समय शिवसेना ने 111 में से 57 सीटों पर दावा कर बड़ा भाई बनने की कोशिश की। उन्हें सिर्फ 20 से 22 सीटों पर रोककर, मैंने नवी मुंबई में अकेले दम पर भाजपा को सत्ता में ला दिया। ठाणे में भाजपा के घोड़ों की लगाम खींच ली गई है, जिससे भाजपा कायकर्ता नाराज हैं।
मैं जिस पार्टी में जाता हूं उसी की बनती है सत्ता
- वन मंत्री गणेश नाईक ने नवी मुंबई मनपा का जिक्र करते हुए कहा कि मैं जिस पार्टी में जाता हूं उसी की सत्ता बनती है।
- हमने पहले कहा था महानगरपालिका के चुनाव कार्यकर्ताओं के हैं, उन्हें एक बार लड़ने दें, जिसके अधिक नगरसेवक जीत कर आएंगे उनका महापौर बनेगा। मैंने यह राय व्यक्त की। कुछ स्थानों पर हमें यह मौका मिला, कुछ स्थानों पर नहीं।
- नाईक ने कहा कि जब मैं शिवसेना में था तब नवी मुंबई में शिवसेना सत्ता में आई, जब मैं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में शामिल हुआ, तो एनसीपी 20 साल तक सत्ता में रही।
- मैं जिस पार्टी में शामिल हुआ वह 25 साल तक सत्ता में रही।
ठाणे में खींची गई भाजपा वालों के घोड़ों की लगाम
- वन मंत्री ने कहा कि ठाणे के लोग वह नहीं कर पाए जो हमने नवी मुंबई में कर दिखाया।
- ठाणे में बीजेपी वालों के घोड़ों की लगाम खींची गई है। ठाणे, कल्याण, उल्हासनगर में बीजेपी कार्यकर्ताओं को हताश किया गया फिर भी कार्यकर्ताओं ने अनुशासन का पालन किया।
- हमारी निजी राय थी कि कोई युति नहीं चाहिए, उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि यदि इस चुनाव में बीजेपी अकेले मैदान में उतरी होती तो सदन में उसका अलग ही जलवा रहा होता।