कांग्रेस का प्रदर्शन (सोर्स: नवभारत फोटो)
ठाणे

ठाणे जिलाधिकारी कार्यालय पर कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ की नारेबाजी

Thane Congress Protest: ठाणे जिलाधिकारी कार्यालय पर SIR और वोट चोरी के आरोपों को लेकर कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपा।

अशोक वर्मा, गोरक्ष पोफली

Thane Collector Office Protest: देश में चल रहे मनमानी एसआईआर और उसके द्वारा की जा रही वोट चोरी के खिलाफ कांग्रेस के देश व्यापी आंदोलन आंदोलन के तहत कांग्रेस द्वारा ठाणे जिलाधिकारी कार्यालय में विरोध प्रदर्शन किया गया।

केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करने के बाद ठाणे जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा।

कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता रहें उपस्थित

इस अवसर पर कल्याण कांग्रेस शहर अध्यक्ष नवीन सिंह, उल्हासनगर शहर अध्यक्ष राहुल सालवे, डोंबिवली शहर अध्यक्ष अमित म्हात्रे, ठाणे शहर अध्यक्ष पिंगले, वरिष्ठ कांग्रेसी रणजीत डांगले, विनय राजू (दुबे), सुभाष सिंह, कुट्टी मनी,वैशाली वाघ, रीना खांडेकर, जायसवाल मेडम,श्रेयस सिंह के साथ ही भारी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे।

कल्याण शहर अध्यक्ष नवीन सिंह और अन्य कांग्रेसी पदाधिकारियों के सहयोग से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ किया गया आंदोलन सफल हुआ।

जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा

SIR को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल

कांग्रेस के राज्य नेतृत्व ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का दावा है कि महाराष्ट्र में तीन करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। कांग्रेस ने देशभर में करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने का भी दावा किया है।

इन आंकड़ों को कांग्रेस के आरोप के रूप में देखा जाना चाहिए; चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर SIR-2026 के तहत मतदाता सूची और नाम खोजने की सुविधाएं उपलब्ध हैं। कांग्रेस ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 से पहले मतदाता सूची में करीब 47 लाख मतदाताओं की वृद्धि का मुद्दा भी उठाया है।

पार्टी का कहना है कि इन मतदाताओं की मौजूदा स्थिति का सत्यापन किया जाना चाहिए। कांग्रेस ने महाराष्ट्र के अलावा बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। ये पार्टी द्वारा लगाए गए आरोप हैं।

ECI में असहमति की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद

यह विवाद उस रिपोर्ट के बाद तेज हुआ जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और निर्देशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में SIR, मतदाता नाम जोड़ने-हटाने और चुनावी डेटा से जुड़े फैसलों पर आपत्तियों का उल्लेख किया गया है।

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