ठाणे कोस्टल रोड-1 का 45% भौतिक काम पूरा हुआ।
एक दिन में 10 आई-गर्डर स्थापित कर निर्माण में नया रिकॉर्ड बनाया गया।
13.45 किमी लंबे छह लेन के कॉरिडोर का लक्ष्य 2027 तक पूरा करना है।
45 Percent Work Completed Of Project: मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (MMRDA) क्षेत्र विशेषकर ठाणे शहर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में निर्माणाधीन ठाणे कोस्टल रोड-1 प्रोजेक्ट ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
एमएमआरडीए के अधीन इस परियोजना टीम ने एक ही दिन में 10 आई-गर्डर स्थापित कर निर्माण कार्य में नया रिकॉर्ड बनाया। आमतौर पर इस तरह के बड़े प्रोजेक्ट में प्रतिदिन 4 से 6 गर्डर स्थापित किए जाते हैं।
ऐसे में एक दिन में 10 गर्डर लॉन्चिंग से परियोजना के निर्माण कार्य को गति मिलने की उम्मीद है। एमएमआरडीए के अनुसार, परियोजना का कुल भौतिक कार्य अब 45 प्रतिशत पूरा हो चुका है।
ठाणे कोस्टल रोड-1 परियोजना खारेगांव टोल नाका से गायमुख तक 13.45 किमी लंबा 6 लेन का ग्रीनफील्ड मार्ग है। यह प्रवेश-नियंत्रित कॉरिडोर मुंबई-नासिक राजमार्ग और गायमुख के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा। परियोजना का प्रमुख उद्देश्य घोड़बंदर रोड पर बढ़ते यातायात दबाव को कम करना और शहर के अंदर वाहनों के लिए एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराना है।
वर्तमान में घोड़बंदर रोड ठाणे के प्रमुख यातायात मार्गों में शामिल है। इस मार्ग पर स्थानीय और लंबी दूरी के वाहनों की आवाजाही के कारण कई हिस्सों में भारी जाम लगा रहता है। कोस्टल रोड शुरू होने के बाद खारेगांव, ठाणे और गायमुख की दिशा में आने-जाने वाले यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग मिलने की उम्मीद है।
मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण के अनुसार, परियोजना में एलिवेटेड वायाडक्ट, पुल और सड़क के अन्य हिस्सों का निर्माण किया जा रहा है। इसकी प्रमुख विशेषताओं में लगभग 8.11 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड मार्ग और मैंग्रोव क्षेत्रों से गुजरने वाले हिस्से शामिल हैं। परियोजना में जमीन पर मोनोपाइल नींव के साथ सिंगल-पाइल, सिंगल-पियर प्रणाली का भी उपयोग किया जा रहा है।
यह कॉरिडोर भविष्य में ठाणे कोस्टल रोड-2, ठाणे रिंग मेट्रो और अन्य प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं के साथ बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने में मदद करेगा। इससे ठाणे के साथ-साथ भिवंडी, नासिक और गुजरात की ओर जाने वाले यातायात को भी लाभ मिलने की संभावना है।
एक दिन में 10 आई-गर्डर स्थापित करने की उपलब्धि निर्माण की रफ्तार के लिहाज से अहम है। इन प्रोजेक्ट को 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।